गोवा विधानसभा ने शुक्रवार को एक कानून पास किया है जिसके तहत अब गोवा में नाम बदलना आसान नहीं होगा। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि डर था कि बाहरी लोग अपना नाम बदलकर उन्हें गोवा के निवासियों की तरह कर रहे हैं।
कुछ लोग मृतकों के नाम पर अपना नाम रख रहे हैं तो कुछ उत्तराधिकार का दावा करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। इसी कारण विधानसभा ने एक कानून पास किया है जो लोगों को ना बदलने से रोकता है और उल्लंघन करने वालों को कम से कम तीन महीने की सजा देता है।
बिल के अनुसार अब केवल वही लोग अपने नाम को बदलवा सकेंगे जिनका नाम जन्म प्रमाण पत्र में गलत लिखा होगा या जिसका मतलब अप्रिय या अरुचिकर होगा। इससे पहले के कानून के अंतर्गत लोग बिना कारण बताए नाम बदल सकते थे। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सोनू शर्मा ने अपना नाम बदलकर फ्रांसिस जेवियर डिसूजा, मल्लपा मसमर्दी ने मार्क मास्करेहस, मोहन करुणाकर ने जिम्मी लोबो, असीज महामद अली ने असीज मैक्स फर्नांडिज और मलिकसाब सनदी ने मार्क फर्नांडिज रख लिया है।
अधिकारियों का कहना है कि इन सभी ने बिना कोई कारण बताए अपने नाम बदले हैं। सरकार ने यह कदम तब उठाया जब बाहरी लोगों ने अखबारों में नोटिस देकर अपने नाम को बदलकर गोवा के लोगों के नामों की तरह कर लिया। नए कानून के अनुसार 'जो कोई भी अपना नाम या उपनाम या दोनों को बदलता है या किसी भी नोटिस/ विज्ञापन में प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रकाशित करता है उसे सात दिन से तीन महीने तक के कारावास का दंड दिया जाएगा।'
प्रस्तावित परिवर्तन के अनुसार अब अपना नाम बदलने के इच्छुक व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका कारण बताना होगा। जिसके बाद मजिस्ट्रेट नाम परिवर्तन पर आपत्तियों को आमंत्रित करने के लिए एक नोटिस प्रकाशित करेगा और यदि 30 दिनों के भीतर कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो उसे नाम बदलने की अनुमति दे दी जाएगी। विधानसभा ने बिना ज्यादा चर्चा के यह बिल पारित कर दिया। सभी पार्टियों ने इसका समर्थन किया।