गोवा की राजनीति में अरसे से मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होता आया है। दो अहम क्षेत्रीय दल महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी और गोवा फारवर्ड ब्लॉक पहले ही इन दोनों दलों को नफा नुकसान पहुंचाते रहे हैं। इन दलों की उपस्थिति के बीच टीएमसी समेत दो नए दलों की एंट्री से विधानसभा चुनाव का मुकाबला बहुकोणीय होने के आसार हैं।
दलों की भीड़ ने गोवा इन विधानसभा चुनावों को दिलचस्प बना दिया है। पुराने दलों की मौजूदगी के बीच मुकाबले में तूणमूल कांग्रेस समेत दो क्षेत्रीय दलों रवॉल्यूशनरी गोअन्स और ‘गोएन्चो आवाज के प्रवेश ने सियासी समीकरण उलट-पलट दिए हैं। फिलहाल अनुमान लगाना कठिन है कि जनादेश का ऊंट आखिर किस करवट बैठेगा।
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गौरतलब है कि गोवा की राजनीति में अरसे से मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होता आया है। दो अहम क्षेत्रीय दल महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी और गोवा फारवर्ड ब्लॉक पहले ही इन दोनों दलों को नफा नुकसान पहुंचाते रहे हैं। इसके अलावा राज्य की राजनीति में एनसीपी, आप और शिवसेना भी सक्रिय है। इन दलों की उपस्थिति के बीच टीएमसी समेत दो नए दलों की एंट्री से विधानसभा चुनाव का मुकाबला बहुकोणीय होने के आसार हैं।
तब हार कर भी जीत गई थी भाजपा
बीते चुनाव में भाजपा बहुमत से आठ सीट दूर थी, कांग्रेस को महज चार सीटों की जरूरत थी। हालांकि भाजपा ने एमजीपी, जीएफबी और निर्दलीय विधायकों को साध कर कांग्रेस के सरकार बनाने के मंसूबे पर पानी फेर दिया था। इस चुनाव में कांग्रेस केसामने भाजपा से पिछला बदला चुकाने की चुनौती है। जबकि भाजपा के पास लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की चुनौती है।