बंगलूरू एयरपोर्ट पर 11 नवंबर को गो एयर विमान दुर्घटना में भारत का विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय ने कार्रवाई करते हुए पायलटों को निलंबित कर दिया है।गोएयर के ए-320 नियो विमान में उस समय 146 यात्री मौजूद थे जिस समय विमान एक बड़े हादसे का शिकार होते-होते बच गया।
विमान जब जमीन से 50 फीट की ऊंचाई पर था तब विमान के पायलट को घने कोहरे के कारण बंगलूरू हवाई अड्डे पर रनवे नहीं दिखाई दिया। जिसके बाद उन्होंने विमान को दाईं ओर मोड़ दिया। जहां जमीन पर घास थी। इसके बाद उन्होंने दोबारा विमान को टेक ऑफ किया।
इस मामले में भारत का विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने गोएयर विमान के जी8-811 पायलटों को निलंबित कर दिया है। यह विमान नागपुर से बेंगलूरू पहुंची थी। यह घटना पिछले साल 11 नवंबर को हुई थी।
डीजीसीए के अनुसार, 50 फीट की ऊंचाई पर क्रू को कोहरे के कारण दृश्यता नहीं होने की वजह से रनवे नहीं दिखा और उन्होंने विमान को गलत जगह लैंड कर दिया। इस मामले में को-पायलट ने पायलट को अलर्ट नहीं किया और लैंडिंग से पहले इससे जुड़े सही दिशा-निर्देश नहीं दिए जो एक उल्लंघन है।
डीजीसीए यह भी बताता है कि विमान के पायलट रनवे की केंद्र रेखा में विमान को उतारने में विफल रहे क्योंकि उन्हें रनवे दिखाई नहीं दिया। इसके बजाय क्रू ने रनवे के गलत दृश्य संदर्भ को मानते हुए विमान को बंगलूरू हवाई अड्डे के बाईं तरफ मोड़कर इसे घास पर लैंड कर दिया। इस दौरान विमान में मौजूद को-पायलट ने विमान उड़ा रहे पायलट को उनकी गलती के लिए अलर्ट नहीं किया।
इसके बाद क्या हुआ उसे एक यात्री शफीक हमजा ने वीडियो में रिकॉर्ड कर लिया। घटना में किसी यात्री को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था। घटना के बाद डीजीसीए ने दोनों पायलटों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। डीजीसीए ने जांच के बाद बताया कि पायलटों ने अपनी गलती मानी है। इसके बाद पायलट को छह महीने और को-पायलट को तीन महीवे के लिए निलंबित किया गया है।