सोमवार को ग्लोबल टेक्नोलॉजी समिट को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि रूस के साथ हमारा रिश्ता ऐसा रिश्ता नहीं है, जो एक पल, एक दिन, एक महीने या एक साल में बन गया। यह करीब 60 साल का संचित रिश्ता है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर का कहना है कि भारत और रूस का रिश्ता किसी मजबूरी का नाम नहीं, बल्कि मजबूती का नाम है। दोनों देशों की दोस्ती अचानक नहीं हुई है, बल्कि 60 वर्ष के भरोसे की मजबूत बुनियाद पर टिकी है।
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सोमवार को ग्लोबल टेक्नोलॉजी समिट को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि रूस के साथ हमारा रिश्ता ऐसा रिश्ता नहीं है, जो एक पल, एक दिन, एक महीने या एक साल में बन गया। यह करीब 60 साल का संचित रिश्ता है।
कहां और कितना निर्भर रहना है भारत का चुनाव
उन्होंने कहा, अक्सर पश्चिम में इस रिश्ते को इस तरह से परिभाषित किया जाता है कि मानो भारत के सामने कुछ मजबूरियां हैं या हम रूस पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हैं। भारत-रूस के रिश्ते की ऐसी व्याख्या करने वालों को यह समझना चाहिए कि यह भारत का चुनाव है कि वह कहां और कितना निर्भर रहना चाहता है।
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इसके अलावा यह भी जानें कि इस रिश्ते ने हमें कई बार बचाया है। जयशंकर ने दोनों पक्षों के बीच जुड़ाव के ऐतिहासिक पहलुओं का भी जिक्र करते हुए कहा, अगर यूरेशियन भूभाग को देखें तो यह समझ में आता है कि भारत और रूस के बीच मजबूत संबंध होंगे, क्योंकि यह आपके पड़ोसी के पड़ोसी की राजनीति के सिद्धांत के मुताबिक है।