यह मामला कार्यकर्ता सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश बत्रा द्वारा दायर एक आरटीआई अर्जी से जुड़ा है। बत्रा ने चुनाव आयोग से वित्त अधिनियम में 2017 के संशोधन के बाद चुनावी बांड की शुरूआत से संबंधित पूरा रिकॉर्ड मांगा था।
चुनावी बांड को लेकर आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी देने के मामले में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) और चुनाव आयोग (ECI) आमने-सामने आते नजर आ रहे हैं। सीआईसी ने चुनाव आयोग को अहम निर्देश देते हुए कहा है कि वह एक हलफनामा दे कि उसने चुनावी बांड और संशोधित वित्त अधिनियम के बारे में एक आरटीआई कार्यकर्ता को उसके पास उपलब्ध सारी जानकारी प्रदान की है।
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सीआईसी ने कहा कि चुनाव आयोग एक गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर स्पष्ट करे कि उसने कोई जानकारी नहीं छिपाई है, जिसका खुलासा पारदर्शिता कानून के तहत किया जा सकता है। यह मामला कार्यकर्ता सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश बत्रा द्वारा दायर एक आरटीआई अर्जी से जुड़ा है। बत्रा ने चुनाव आयोग से वित्त अधिनियम में 2017 के संशोधन के बाद चुनावी बांड की शुरूआत से संबंधित पूरा रिकॉर्ड मांगा था।
चुनाव आयोग ने अपने रिकॉर्ड में मौजूद जानकारियां विस्तृत नोट शीट और पत्र के साथ बत्रा को प्रदान की थी। इसके बाद बत्रा सीआईसी के पास पहुंचे और कहा कि उन्हें चुनाव आयोग ने एक लिंक फाइल मुहैया कराई है। इसके जवाब में चुनाव आयोग ने कहा कि बत्रा को सारी जानकारियां मुहैया कराई जा चुकी हैं।
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केंद्रीय सूचना आयोग, सूचना अधिकार कानून के तहत सुनवाई व फैसले के लिए सर्वोच्च निकाय है। बत्रा के मामले में मुख्य सूचना आयुक्त वाईके सिन्हा ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि हलफनामा पेश करें कि कोई जानकारी नहीं छिपाई गई है। इसके अलावा कोई जानकारी ऐसी नहीं है, जो उसके पास है और वह बत्रा को मुहैया नहीं कराई गई है। चुनाव आयोग को यह हलफनामा 15 जुलाई तक पेश करने को कहा गया है।