2021 और 2023 के बीच 11 राज्यों में 18 वर्ष की आयु तक, दोनों लिंग के कुल 15,536 बच्चों और युवाओं को हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनयम (एचएएमए) के तहत गोद लिया गया।
देश में गोद लिए जाने वाले लड़कों की तुलना में बेटियों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले 10 वर्षों में, गोद लिए गए बच्चों में से 80 फीसदी लड़कियां थीं। इसके अलावा, गोद लिए गए सभी बच्चों में से 80 फीसदी 0-2 आयु वर्ग के थे।
विज्ञापन
2021 और 2023 के बीच 11 राज्यों में 18 वर्ष की आयु तक, दोनों लिंग के कुल 15,536 बच्चों और युवाओं को हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनयम (एचएएमए) के तहत गोद लिया गया।
इस अवधि के दौरान माता-पिता ने 6,012 लड़कों की तुलना में 9,474 लड़कियों को गोद लिया। पिछले दो साल में हिंदू अडॉप्शन और मेंटिनेंस एक्ट के तहत बच्चा गोद लेने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही देश में लड़कियों को गोद लेने की प्राथमिकता में उल्लेखनीय झुकाव देखा गया है।