जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनकी बेटियों कृतिका और तारिणी ने अपने माता-पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। जनरल रावत के निधन पर देश-विदेश से भी कई प्रतिक्रियाएं आईं हैं और इस खबर को विदेशी मीडिया ने भी प्रमुखता से जगह दी है। चीन, ब्रिटेन, रूस समेत कई देशों ने सीडीस रावत को श्रद्धांजलि दी है। चीनी मीडिया ने इस पर खास तौर पर प्रतिक्रिया दी है और चीन सरकार के मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने इस घटना पर विशेषज्ञों के हवाले से टिप्पणी की है।
ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी विशेषज्ञों ने कहा कि हेलीकॉप्टर दुर्घटना में भारत के रक्षा प्रमुख की मौत ने देश के सैन्य आधुनिकीकरण को भारी झटका दिया है, जो लंबे समय तक बना रह सकता है। विशेषज्ञों ने यह राय भारतीय मीडिया में प्रकाशित अलग-अलग रिपोर्ट्स के आधार पर दी है। इसमें जनरल रावत के हेलीकॉप्टर क्रैश की वजहें बताई गई हैं। भारतीय मीडिया की विभिन्न रिपोर्टों में अनुमान लगाया कि हेलीकॉप्टर क्रैश की वजह खराब मौसम, बिजली की लाइनों में उलझाव, तकनीकी खामी या गलत ऊंचाई हो सकती है।
सीडीएस जनरल बिपिन रावत (1958 - 2021)
- फोटो : अमर उजाला
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग स्थित सैन्य विशेषज्ञ वेई डोंगक्सू ने गुरुवार कहा ‘Mi-17V5, Mi-17 का एक उन्नत संस्करण है। यह अधिक शक्तिशाली इंजन और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लैस है। वेई ने कहा भारतीय सेना कई प्रकार के हेलीकॉप्टरों का संचालन करती है, जिनमें घरेलू रूप से विकसित किए गए, अमेरिका और रूस से आयातित हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इनके रखरखाव की समस्या हो सकती है।
रावत का निधन आधुनिकीकरण की योजना को अस्त-व्यस्त कर देगा
वेई ने कहा कि रावत की भूमिका भारत की थलसेना, नौसेना और वायुसेना में अंतर्विरोधों को दूर करने और सेना के आधुनिकीकरण के लिए इन बलों को एकीकृत करने की थी। उनका निधन संभवतः भारतीय सेना की आधुनिकीकरण योजना को अस्त-व्यस्त कर देगा।
बिपिन रावत को अनोखी श्रद्धांजलि
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एक अन्य चीनी सैन्य विशेषज्ञ के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि चाहे 2019 में भारत के विमानवाहक पोत में आग की घटना हो या उससे पहले 2013 में एक भारतीय पनडुब्बी में विस्फोट सहित कुछ पिछली दुर्घटनाएं हों, इनमें मानवीय त्रुटियों का पता लगाया जा सकता है।
दुर्घटना से बचा जा सकता था
चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया हेलीकॉप्टर दुर्घटना से बचा जा सकता था। उदाहरण के लिए, मौसम में सुधार होने तक उड़ान को रोका जा सकता था। पायलट और अधिक सावधानी या कुशलता से उड़ान भर सकते थे या हेलीकॉप्टर का रखरखाव ठीक से किया जा सकता था। इन सब बातों ने एक बार फिर भारतीय सेना की तैयारियों की कमी को उजागर कर दिया।
सीमा विवाद पर दृष्टिकोण नहीं बदलेगा
सिंघुआ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय रणनीति संस्थान में अनुसंधान विभाग के निदेशक कियान फेंग का कहना है कि चीन-भारत सीमा मुद्दा केवल एक सैन्य मुद्दा नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक भी है। सीमा मुद्दे पर भारत जो करता है, वह काफी हद तक मोदी सरकार की नीतियों पर निर्भर करता है। इसलिए सिर्फ इस हादसे के कारण भारत सीमा मुद्दे पर अपना दृष्टिकोण नहीं बदलेगा।