महाराष्ट्र के नासिक के नंदगांव तालुका में स्थित नेदोंगरी गांव में सबसे बड़ी समस्या है पानी की कमी की। जो गर्मियों में और भी विकट हो जाती है। यहां गवलीवाडा समुदाय रहता है। जो भैंस चराने वाला समुदाय है। यह समुदाय बीते पांच दशक से प्रवास की समस्या से जूझ रहा है। यहां करीब 1800 से 2,000 भैंस पाली जाती हैं।
अभी गर्मी आने में करीब 4 महीने बाकी हैं लेकिन पानी की कमी से लोगों को पहले ही जूझना पड़ रहा है। यहां के निवासी शंकर उमाजी नामदे (60) अपने जानवरों के लिए इस जगह से करीब 100 किमी की दूरी पर जमीन किराए पर लेने की बात कर रहे हैं। गांव के लोग पानी की समस्या के कारण अपने परिवारों से दूर जा रहे हैं। उन्हें अपने बच्चों और पत्नी को घर पर ही छोड़ना पड़ रहा है ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
नामदे का कहना है, "परिवार विभाजित हो रहे हैं, और भी कई तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं, यह बताने की जरूरत नहीं है कि यह बेहद नुकसान वाला साल है।" यहां के लोग अपने मेहमानों का आदर सत्कार अधिकतर दूध से करते हैं क्योंकि यहां पानी की बेहद कमी है। गांव वालों का कहना है कि अभी से ही पानी की कमी है, मार्च-अप्रैल में क्या होगा?
अब गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत लोगों को वापस गांव में रहने के लिए कह रहे हैं। लेकिन जानवरों को लिए रोजाना 50 हजार लीटर पानी की व्यवस्था करना भी असंभव ही है। इस बार महाराष्ट्र में बारिश 30 फीसदी तक कम हुई है।
सूखा प्रभावित है आधा राज्य
24 अक्तूबर को राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस बात को माना था कि आधा राज्य सूखे से प्रभावित है। इनमें से सबसे ज्यादा खराब हालात मराठवाड़ा और नासिक के जिलों के हैं। सभी सूखा प्रभावित जिलों में रबी की फसलों को भी काफी नुकसान हुआ है। ऐसे समुदाय जो पारंपरिक रूप से विस्थापित नहीं होते हैं, वह भी काम की तलाश में विस्थापित हो रहे हैं।