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Gangsters nexus: दूसरे देशों में बैठे अपराधियों की भारतीय जेलों में सेंध, ये लोग पहुंचा रहे सलाखों के पीछे फोन

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 07 Apr 2023 07:06 PM IST

सार

Gangsters nexus: संसदीय समिति ने नोट किया है कि कुछ केसों में जेल का स्टाफ, जिसमें वहां के अस्पताल में कार्यरत मेडिकल पर्सनल भी शामिल हैं, कैदियों के लिए मोबाइल फोन एवं दूसरी प्रतिबंधित वस्तुओं का इंतजाम करते हैं। यह सब इसलिए भी संभव हो पाता है, क्योंकि जेल में तैनात स्टाफ, लंबे समय से वहीं पर बना रहता है...
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Gangsters nexus: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई व जग्गू भगवानपुरिया। - फोटो : Amar Ujala

विदेश में बैठे गैंगस्टर, भारतीय जेलों में बंद अपने गुर्गों से जो काम चाहते हैं, वह करा लेते हैं। किसी की हत्या करनी है, ड्रग की सप्लाई देनी है, हथियार पहुंचाने हैं या अवैध शराब के ठेकेदारों और माइनिंग माफिया से उगाही करनी है, ये सब काम जेल में बैठे बिठाए हो जाते हैं। हालांकि अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी 'एनआईए' ने इस तरह की सांठ-गांठ को काफी हद तक तोड़ने में सफलता हासिल की है, लेकिन कई राज्यों की जेलों में ऐसे गैंग अभी भी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। दूसरे मुल्कों में बैठे गैंगस्टर की भारतीय जेलों में सेंध और सलाखों के पीछे मौजूद उनकी टोली तक मोबाइल फोन, कौन पहुंचा रहा है, अब इसका खुलासा हुआ है। कारागृह में मोबाइल व दूसरी प्रतिबंधित वस्तुएं पहुंचाने में जेल स्टाफ के अलावा वहां स्थित अस्पताल के कर्मी भी शामिल रहे हैं।

जेलों को नहीं मिल सके पर्याप्त उपकरण

गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की 242वीं रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022-23 में जेलों के आधुनिकीकरण के लिए 400 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया। बाद में रिवाइज एस्टीमेट पर सौ करोड़ रुपये कम कर दिए गए, क्योंकि तकनीकी समस्या के कारण फंड समय पर रिलीज नहीं हो सका। इसके पीछे सेंट्रल नोडल एजेंसी और स्टेट नोडल अकाउंट का ठीक तरह से लागू नहीं होना रहा। इस वजह से विभिन्न राज्यों की जेलों के लिए जिन उपकरणों की खरीद होनी थी, वह नहीं हो सकी।

यह भी पढ़ें: UP News: दीपक बॉक्सर की मदद करने वाले सिपाही को भेजा गया जेल, बिना जांच पासपोर्ट सत्यापन की लगा दी थी रिपोर्ट

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो पेशी

संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि इस राशि को वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले ही जारी कर दिया जाए। केंद्रीय गृह मंत्रालय इस बाबत राज्यों को एक एडवाइजरी जारी करे कि जेलों में जैमर लगवाने, डोर फ्रेम, हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर, बॉडी वॉर्न कैमरा, सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम और कंप्यूटर आदि खरीदने के लिए पर्याप्त फंड मुहैया कराए। इससे जेल में नशे एवं दूसरे अपराधों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। राज्य यह भी सुनिश्चित करें कि जेल के भीतर से ही वीडियो कॉंफ्रेंसिंग के जरिए क्रिमिनल की पेशी कराई जाए।

ऐसे हो जाती है जेल स्टाफ के बीच सांठ-गांठ

संसदीय समिति ने नोट किया है कि कुछ केसों में जेल का स्टाफ, जिसमें वहां के अस्पताल में कार्यरत मेडिकल पर्सनल भी शामिल हैं, कैदियों के लिए मोबाइल फोन एवं दूसरी प्रतिबंधित वस्तुओं का इंतजाम करते हैं। यह सब इसलिए भी संभव हो पाता है, क्योंकि जेल में तैनात स्टाफ, लंबे समय से वहीं पर बना रहता है। इसके चलते कैदियों और जेल स्टाफ के बीच सांठ-गांठ हो जाती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय, ऐसे सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी करे कि वहां पर तैनात स्टाफ का तबादला एक नियमित अंतराल पर होता रहे। तबादला/पोस्टिंग की इस प्रक्रिया में मेडिकल स्टाफ को भी शामिल करें। जेल में तैनात होने वाले सभी कर्मियों का एक निश्चित कार्यकाल तय किया जाए। यूटी के जेल स्टाफ का कैडर बनाकर उन्हें दूसरी यूटी की किसी जेल में पोस्टिंग दी जाए। जेलों में तकनीकी उपकरणों की ज्यादा से ज्यादा मदद लेकर मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं को कारागार में पहुंचने से रोका जाए।

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Gangsters nexus: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई व जग्गू भगवानपुरिया। - फोटो : Amar Ujala

विदेश में बैठे गैंगस्टर, भारतीय जेलों में बंद अपने गुर्गों से जो काम चाहते हैं, वह करा लेते हैं। किसी की हत्या करनी है, ड्रग की सप्लाई देनी है, हथियार पहुंचाने हैं या अवैध शराब के ठेकेदारों और माइनिंग माफिया से उगाही करनी है, ये सब काम जेल में बैठे बिठाए हो जाते हैं। हालांकि अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी 'एनआईए' ने इस तरह की सांठ-गांठ को काफी हद तक तोड़ने में सफलता हासिल की है, लेकिन कई राज्यों की जेलों में ऐसे गैंग अभी भी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। दूसरे मुल्कों में बैठे गैंगस्टर की भारतीय जेलों में सेंध और सलाखों के पीछे मौजूद उनकी टोली तक मोबाइल फोन, कौन पहुंचा रहा है, अब इसका खुलासा हुआ है। कारागृह में मोबाइल व दूसरी प्रतिबंधित वस्तुएं पहुंचाने में जेल स्टाफ के अलावा वहां स्थित अस्पताल के कर्मी भी शामिल रहे हैं।

जेलों को नहीं मिल सके पर्याप्त उपकरण

गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की 242वीं रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022-23 में जेलों के आधुनिकीकरण के लिए 400 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया। बाद में रिवाइज एस्टीमेट पर सौ करोड़ रुपये कम कर दिए गए, क्योंकि तकनीकी समस्या के कारण फंड समय पर रिलीज नहीं हो सका। इसके पीछे सेंट्रल नोडल एजेंसी और स्टेट नोडल अकाउंट का ठीक तरह से लागू नहीं होना रहा। इस वजह से विभिन्न राज्यों की जेलों के लिए जिन उपकरणों की खरीद होनी थी, वह नहीं हो सकी।

यह भी पढ़ें: UP News: दीपक बॉक्सर की मदद करने वाले सिपाही को भेजा गया जेल, बिना जांच पासपोर्ट सत्यापन की लगा दी थी रिपोर्ट

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो पेशी

संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि इस राशि को वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले ही जारी कर दिया जाए। केंद्रीय गृह मंत्रालय इस बाबत राज्यों को एक एडवाइजरी जारी करे कि जेलों में जैमर लगवाने, डोर फ्रेम, हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर, बॉडी वॉर्न कैमरा, सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम और कंप्यूटर आदि खरीदने के लिए पर्याप्त फंड मुहैया कराए। इससे जेल में नशे एवं दूसरे अपराधों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। राज्य यह भी सुनिश्चित करें कि जेल के भीतर से ही वीडियो कॉंफ्रेंसिंग के जरिए क्रिमिनल की पेशी कराई जाए।

ऐसे हो जाती है जेल स्टाफ के बीच सांठ-गांठ

संसदीय समिति ने नोट किया है कि कुछ केसों में जेल का स्टाफ, जिसमें वहां के अस्पताल में कार्यरत मेडिकल पर्सनल भी शामिल हैं, कैदियों के लिए मोबाइल फोन एवं दूसरी प्रतिबंधित वस्तुओं का इंतजाम करते हैं। यह सब इसलिए भी संभव हो पाता है, क्योंकि जेल में तैनात स्टाफ, लंबे समय से वहीं पर बना रहता है। इसके चलते कैदियों और जेल स्टाफ के बीच सांठ-गांठ हो जाती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय, ऐसे सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी करे कि वहां पर तैनात स्टाफ का तबादला एक नियमित अंतराल पर होता रहे। तबादला/पोस्टिंग की इस प्रक्रिया में मेडिकल स्टाफ को भी शामिल करें। जेल में तैनात होने वाले सभी कर्मियों का एक निश्चित कार्यकाल तय किया जाए। यूटी के जेल स्टाफ का कैडर बनाकर उन्हें दूसरी यूटी की किसी जेल में पोस्टिंग दी जाए। जेलों में तकनीकी उपकरणों की ज्यादा से ज्यादा मदद लेकर मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं को कारागार में पहुंचने से रोका जाए।

जेल की बाथरुम से बरामद किया गया सामान। - फोटो : अमर उजाला
एनआईए ने की थी राष्ट्रव्यापी रेड

एनआईए ने गत 23 फरवरी को खालिस्तानी विचारधारा के समर्थकों, आतंकियों, ड्रग स्मगलरों और गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के सहयोगियों के ठिकानों पर राष्ट्रव्यापी रेड की थी। इसमें छह आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था। इनमें लक्की खोखर उर्फ डेनिस, जो कनाडा बेस्ड नामित आतंकी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डाला के लिए काम करता था, भी शामिल था। ये रेड पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, यूपी, दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में हुई थी। इनमें लारेंस बिश्नोई के अलावा जग्गू भगवानपुरिया और गोल्डी बरार के भी कई सहयोगी थे। ये लोकल गैंगस्टर, विदेशों में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर काम करते थे। इसमें धन जुटाना या किसी की हत्या करना भी शामिल था। कुछ आरोपी खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स, बब्बर खालसा इंटरनेशनल और अंतराष्ट्रीय सिख युवा फेडरेशन जैसे संगठनों से मिले हुए थे। गैंगस्टर सुरेंद्र चौधरी और दिलीप बिश्नोई, गोल्डी बरार व लारेंस बिश्नोई के इशारे पर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते थे। लारेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया, काला जठेरी, काला राणा, जोगेंद्र सिंह, राजेश कुमार, राजू बसौदी, अनिल छिप्पी, नरेश यादव और शाहबाज अंसारी को एनआईए ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। ये सब गैंगस्टर अवैध शराब ठेकेदारों और माइनिंग कॉन्ट्रेक्टरों से वसूली करते थे।

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इन पांच देशों में बैठे हैं गैंगस्टर

एनआईए की पूछताछ में सामने आया था कि कई गैंगस्टर, भारत से बाहर निकल कर पाकिस्तान, मलेशिया, फिलीपींस, कनाडा और आस्ट्रेलिया से आतंकी व आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। इसके लिए वे भारतीय जेलों में बंद अपने सहयोगियों की मदद लेते थे। जेलों के भीतर से टारगेट किलिंग और फंड जुटाने का काम होता था। हथियारों और ड्रग की स्मगलिंग, हवाला व उगाही जैसे धंधे जेलों से ही अंजाम दिए जाते थे। बीते दिनों जेल में बंद लारेंस बिश्ननोई का एक इंटरव्यू वायरल हो गया था। पंजाब पुलिस को इस मामले में सफाई देनी पड़ी थी कि ऐसा उनकी जेल से नहीं हुआ है। बिश्नोई के सहयोगी और गैंगस्टर दीपक बॉक्सर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मैक्सिको से पकड़ा है। उसने पूछताछ में बताया कि वह जेल में बंद गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई से फोन पर लगातार बातचीत करता था। दीपक बाक्सर, गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के भी संपर्क में था।

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