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महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे, नहीं बदली किसानों की किस्मत

Wed, 29 Mar 2017 07:24 AM IST
amarujala.com-presented by-संदीप भ्ाट्ट
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ब्यूरो/अमर उजाला, मुंबई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की चंपारण यात्रा और किसानों के समर्थन में उनके सत्याग्रह आंदोलन के 100 साल पूरे होने के बावजूद भी किसानों की किस्मत नहीं बदली है। इस दौरान बुधवार को मुंबई से चंपारण तक शताब्दी यात्रा निकाली जाएगी। किसानों को समर्पित 15 सदस्यीय यह दल मुंबई से चंपारण और दिल्ली (राजघाट) तक 3500 किलोमीटर की यात्रा करेगा। इस यात्रा की अगुवाई कर रहे मीरा भाईंदर जिला कांग्रेस के महासचिव राजकुमार मिश्र ने बताया कि चंपारण से दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को 16 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा जाएगा। 
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मंगलवार को मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में मिश्र ने कहा कि सवा करोड़ आबादी वाले इस देश में कृषि पर बहुत कुछ करने की जरूरत है। देश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उसके बावजूद कृषि क्षेत्र का उद्योग और सेवा क्षेत्र की तरह विकास नहीं हुआ।

उन्होंने बताया कि चंपारण यात्रा 29 मार्च से शुरू होकर तीन अप्रैल को समाप्त होगी। इस दौरान मुंबई से पटना और पटना से चंपारण के विभिन्न स्थानों की यात्रा के बाद पटना से दिल्ली पहुंचेंगे और प्रतिनिधिमंडल के साथ महात्मा गांधी की समाधि राजघाट जाएंगे। उसके बाद किसानों से संबंधित 16 सूत्रीय मांगें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को सौंपेंगे। मिश्र ने कहा कि किसानों की मांग को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय मांगा गया है।
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इस मौके पर चंपारण सत्याग्रह शताब्दी यात्रा के  उद्देश्य का उल्लेख करते हुए मुंबई विश्वविद्यालय में हिंदी के विभागाध्यक्ष करुणा शंकर उपाध्याय ने कहा कि असली भारत गांवों में बसता है लेकिन उन्हें उपेक्षित रखा गया है। साल 1917 से लेकर 2017 तक एक शताब्दी बीत जाने के बावजूद किसान बदहाल हैं।

गांव आज भी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने राजकुमार मिश्र के  नेतृत्व में चंपारण यात्रा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्तमान में गांधी की तरह नेता की दरकार है। वहीं, एम.डी. कालेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश शुक्ल ने कहा कि चंपारण संघर्ष और सृजन की भूमि है। चंपारण यात्रा ने मोहन दास कर्मचंद गांधी को महात्मा बनाया। युवा पीढ़ी द्वारा चंपारण सत्याग्रह को याद करना सराहनीय है।
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