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गगनयान: 7 दिनों तक अतंरिक्ष में रहने वाले 3 भारतीयों का ऐसे होगा चयन, पैदा 15 हजार नौकरियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा मेहरोत्रा Updated Sun, 30 Dec 2018 02:29 PM IST
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Ganganyaan mission

मोदी कैबिनेट ने हाल ही में 10 हजार करोड़ की महत्वकांक्षी गगनयान परियोजना को मंजूरी दी है। इस मिशन के तहत तीन भारतीयों को सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इस मिशन के सफल होने पर भारत मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। इस परियोजना में मदद के लिए भारत ने पहले ही रूस और फ्रांस के साथ करार किया है। अभी तक रूस, अमेरिका और चीन ही ऐसे देश हैं जिन्होंने मानव को अंतरिक्ष में भेजा है।

इसरो के लिए बड़ी चुनौती

इस मिशन को साल 2022 तक पूरा करना भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इसरो को मियाद (2022) में काम पूरा करने के लिए पूरी तत्परता के साथ काम करना होगा। इस काम के लिए करीब 40 महीनों का ही समय है। इतने कम समय में काम को पूरा कर पाना इसरो के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।



ये है इसरो की योजना

इसरो के चेयरमैन के. सिवान का कहना है कि उनकी टीम इस मिशन पर बीते चार महीने से काम कर रही है। मिशन के डिजाइन पर भी काम शुरू हो चुका है। टेस्ट फ्लाइट के तौर पर इसके फाइनल मिशन से पहले दो मानवरहित मिशन लांच किए जाएंगे।

इसरो चेयरमैन का कहना है कि पहला मानवरहित मिशन यानी टेस्ट फ्लाइट दिसंबर, 2020 में लांच होगी। दूसरा मानवरहित टेस्ट जुलाई, 2021 में लांच होगा। इसके बाद आखिर में फाइन मिशन यानी ह्यूमन स्पेस फ्लाइट को दिसंबर 2021 में लांच किया जाएगा। 

ट्रेनिंग का काम शुरू

बजट पास होने के बाद क्रू की ट्रेनिंग पर काम शुरू हो चुका है। इसमें जरूरत पड़ने पर विदेशी ट्रेनिंग को भी शामिल किया जा सकता है। क्रू मेंबर का चुनाव इसरो और आईएएफ द्वारा संयुक्त तौर पर किया जाएगा। जिसके बाद उन्हें दो से तीन सालों तक ट्रेनिंग दी जाएगी। इस मिशन के लिए राकेश शर्मा का भी परामर्श लिया जाएगा।   

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Ganganyaan mission
मोदी कैबिनेट ने हाल ही में 10 हजार करोड़ की महत्वकांक्षी गगनयान परियोजना को मंजूरी दी है। इस मिशन के तहत तीन भारतीयों को सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इस मिशन के सफल होने पर भारत मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। इस परियोजना में मदद के लिए भारत ने पहले ही रूस और फ्रांस के साथ करार किया है। अभी तक रूस, अमेरिका और चीन ही ऐसे देश हैं जिन्होंने मानव को अंतरिक्ष में भेजा है।

इसरो के लिए बड़ी चुनौती

इस मिशन को साल 2022 तक पूरा करना भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इसरो को मियाद (2022) में काम पूरा करने के लिए पूरी तत्परता के साथ काम करना होगा। इस काम के लिए करीब 40 महीनों का ही समय है। इतने कम समय में काम को पूरा कर पाना इसरो के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ये है इसरो की योजना

इसरो के चेयरमैन के. सिवान का कहना है कि उनकी टीम इस मिशन पर बीते चार महीने से काम कर रही है। मिशन के डिजाइन पर भी काम शुरू हो चुका है। टेस्ट फ्लाइट के तौर पर इसके फाइनल मिशन से पहले दो मानवरहित मिशन लांच किए जाएंगे।

इसरो चेयरमैन का कहना है कि पहला मानवरहित मिशन यानी टेस्ट फ्लाइट दिसंबर, 2020 में लांच होगी। दूसरा मानवरहित टेस्ट जुलाई, 2021 में लांच होगा। इसके बाद आखिर में फाइन मिशन यानी ह्यूमन स्पेस फ्लाइट को दिसंबर 2021 में लांच किया जाएगा। 

ट्रेनिंग का काम शुरू

बजट पास होने के बाद क्रू की ट्रेनिंग पर काम शुरू हो चुका है। इसमें जरूरत पड़ने पर विदेशी ट्रेनिंग को भी शामिल किया जा सकता है। क्रू मेंबर का चुनाव इसरो और आईएएफ द्वारा संयुक्त तौर पर किया जाएगा। जिसके बाद उन्हें दो से तीन सालों तक ट्रेनिंग दी जाएगी। इस मिशन के लिए राकेश शर्मा का भी परामर्श लिया जाएगा।   

बीते एक दशक से चल रही है तैयारी

ISRO
इसको का कहना है कि इस काम के लिए बीते एक दशक से पूरी मेहनत की जा रही है। इस दौरान तकनीकों का विकास किया गया है। इसके लिए कई बड़ी टेक्नोलॉजी जैसे क्रू मॉड्यूल, क्रू एस्केप सिस्टम, एनवायरमेंट सिस्टम और लाइफ स्पोर्ट सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। अभी तक ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोजेक्ट के लिए बड़ी तकनीकों को विकसित करने में 173 करोड़ रुपये का खर्च आ चुका है।  

मानव मिशन है बेहद मुश्किल

विशेषज्ञों का मानना है कि मानव मिशन बेहद मुश्किल काम होता है। अगर ये आसान होता तो आज केवल दुनिया में तीन ही देश इसे सफल करने वाले नहीं होते बल्कि और भी देश इस सूची में होते। इसरो को इसके लिए बाहुबली रॉकेट की ह्यूमन रेटिंग करनी पड़ेगी,प्री मॉड्यूल बनाना पड़ेगा। इसके अलावा उसे ये भी योजना बनानी पड़ेगी कि अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में क्या काम करेंगे और क्या खाएंगे।

इसके साथ ही अंतरिक्ष यात्रियों के वापस आने के लिए भी तैयारियां की जाएंगी। इसरो का कहना है कि अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी अरेबियन सी में होगी। इसे कर पाना काफी मुश्किल हो सकता है लेकिन इसके लिए इसरो पूरी तैयारी कर रहा है।  

राकेश शर्मा भारत के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अंतरिक्ष की यात्रा की थी। लेकिन वह सोवियत संघ के अंतरिक्ष अभियान के तहत गए थे। साल 2022 तक भारतीय एजेंसी के दम पर जाने का किसी भारतीय का ये पहला अवसर होगा।

ऐसे चुने जाएंगे तीन लोग

जिन तीन लोगों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, उनके चयन का पैमाना काफी कड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जो क्रू मॉड्यूल बना है वह तीन लोगों को ही ले जाने की क्षमता रखता है। तीन लोगों में पहला मौका एयरफोर्स के टेस्ट पायलट को दिया जाएगा क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उनमें इसकी अधिक काबिलियत होगी। 

हालांकि वो तीन यात्री कौन होंगे इसके लिए इसरो ने देश के 30 अलग-अलग लोगों का चयन शुरू कर दिया है। इन्हीं में से तीन लोग आखिर में चुने जाएंगे। इसरो ने इसके लिए लोगों की मेडिकल जांच और माइक्रो-बायोलॉजिकल जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक एक अंतरिक्ष यात्री की करीब 10 जांच की जाएंगी और अगर जरूरत पड़ी तो इससे भी अधिक जांच की जा सकती हैं।

जीएसएलवी मार्क 3 रॉकेट का इस्तेमाल

जीएसएलवी मार्क 3 रॉकेट
स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन वाले जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट की दूसरी सफल उड़ान के बाद इसरो के वैज्ञानिकों के हौसले बुलंद हैं।  इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने घोषणा की थी कि मार्क-3 का पहला अधिकृत मिशन जनवरी, 2019 में चंद्रयान-2 होगा।

सिवन ने मार्क-3 की उड़ान के बाद कहा था, मिशन टीम सही राह पर है और पहले से ही काम कर रही है। उन्होंने स्पष्टतौर पर कहा था कि यह शानदार लांच व्हीकल अगले तीन साल में अंतरिक्ष में किसी भारतीय मानव को ले जाने के लिए तैयार है। विशेषज्ञ बताते हैं कि 2022 से पहले भारत मिशन 'गगनयान' के तहत भारतीयों को इसी जीएसएलवी मार्क 3 रॉकेट से भेजा जाएगा।

बीते साल पीएम ने की थी घोषणा

बीते साल 15 अगस्त को पीएम नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में गगनयान परियोजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि इस परियोजना को 2022 तक अमल में लाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि 2022 तक किसी बेटी या बेटे को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। जिसके बाद इसरो ने इस योजना में तेजी लाई। इसी क्रम में नवंबर में इसरो ने रॉकेट जीएसएलवी मार्क 3डी 2 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया था।

15 हजार नई नौकरियां पैदा होंगी

इसरो के चेयरमैन का कहना है कि इस मिशन के तहत देश में 15 हजार नई नौकरियां पैदा होंगी। इस मिशन से लोगों में विज्ञान और तकनीक के बारे में समझ का स्तर बढ़ेगा। जिससे युवा कुछ नया करने को प्रेरित होंगे।
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