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सिर्फ इसरो का नहीं राष्ट्र का अभियान है ''गगन यान 2022"

Sun, 23 Sep 2018 12:09 PM IST
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Gaganyaan 2022
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स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इसी वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को लालकिले किले से बड़ा एलान किया था। उन्होंने कहा था की 2022 के पहले भारत का कोई बेटा या बेटी अंतरिक्ष में स्वदेशी गगनयान  से पहुंचेगा। इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन) द्वारा कार्यान्वित किये जाने वाले इस मानवरहित अंतरिक्ष अभियान का नाम ''गगनयान'' है।

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इसरो प्रमुख के सिवान ने कहा, ''गगनयान सिर्फ इसरो का ही अभियान नहीं होगा बल्कि देश के कई संस्थानों और दिमागों के योगदान से बना राष्ट्रीय मिशन होगा।''

के सिवान ने बताया कि इस बार भी अंतरिक्ष यात्री का चुनाव वही संस्था करेगी जिसने 1984 में अंतरिक्ष अभियान के लिए राकेश शर्मा का चुनाव किया था। बता दें कि भारतीय वायु सेना के अंतर्गत आने वाला संस्थान (आईएएम) इंस्टिट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन अंतरिक्ष यात्रियों का चुनाव करता है।
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आईएएम कमांडेंट एयर कमोडोर अनुपम अग्रवाल ने कहा की इसके अलावा भी उन्होंने चार विशेष क्षेत्रों में मदद मांगी है जिसमें बुनियादी और अग्रिम प्रशिक्षण, हैबिटाट मॉड्यूल, क्रू कैप्सूल की मानव इंजीनियरिंग और फ्लाइट सर्जन सपोर्ट शामिल हैं।

अंतरिक्ष यात्रियों का चुनाव

अंतरिक्ष यात्रियों का चुनाव एक जटिल एवं लंबी प्रक्रिया है जिसमे कम से कम 14 से 12 महीनों का समय लगता है। मूलभूत मूल्यांकन में मनोवैज्ञानिक एवं मेडिकल टेस्ट सम्मिलित होता है। कमांडेंट अग्रवाल के अनुसार, गगन यान अभियान के लिए 30 प्रतिभागियों के समूह की जरूरत होगी जिनमे से 15 का चुनाव करके उन्हें मूलभूत प्रशिक्षण दिया जायेगा।

इसके अतिरिक्त अंतरिक्ष यात्रियों को जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान और दवाइयों के बारे में भी प्रशिक्षण दिया जायेगा। आईएएम जहां उन्हें मेडिसिन का प्रशिक्षण देगा वहीं दूसरे क्षेत्र के विशेषज्ञ भी प्रशिक्षण देंगे।

फ्लाइट सर्जन

कमांडेंट अग्रवाल के मुताबिक, अंतरिक्षफ्लाइट का एक जटिल प्रारूप होता है फ्लाइट सर्जन सपोर्ट, आईएएम द्वारा मुहैया कराया जायेगा। इस समय आईएएम विशिष्ट सिमुलेटर जैसी अग्रिम प्रशिक्षण नहीं दिया जा सकता। इसे अभी  विकसित भी नहीं किया किया जा सकता और इसी पैराबोलिक फ्लाइट प्रशिक्षण के लिए भारत को दूसरे देश के मदद की आयश्यकता पड़ सकती है।

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