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G20: जापान ने कहा- यूक्रेन में युद्ध पर पहले जैसा रहेगा G-7 का रुख; भारत की जी-20 अध्यक्षता पर कहीं ये बातें

Fri, 28 Jul 2023 09:57 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

G20: जापान ने शुक्रवार को कहा कि यूक्रेन में युद्ध पर जी-7 देशों का रुख वही रहेगा और यह जी-20 की भारतीय अध्यक्षता पर निर्भर करता है कि वह समूह के आगामी शिखर सम्मेलन में अपनाए जाने वाले नेताओं के घोषणापत्र के मसौदे पर आम सहमति बनाए। 
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Yukiko Okano - फोटो : Social Media
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विस्तार
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जापान ने शुक्रवार को कहा कि यूक्रेन में युद्ध पर जी-7 देशों का रुख वही रहेगा और यह जी-20 की भारतीय अध्यक्षता पर निर्भर करता है कि वह समूह के आगामी शिखर सम्मेलन में अपनाए जाने वाले नेताओं के घोषणापत्र के मसौदे पर आम सहमति बनाए। 

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भारत के सामने पश्चिमी देशों और रूस-चीन के बीच तीखे मतभेदों के मद्देनजर इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने की कठिन चुनौती है। जापान के विदेश मंत्रालय में उप प्रेस सचिव युकिको ओकानो ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि जापान के विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी और उनके भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के बीच गुरुवार शाम को हुई बातचीत में यूक्रेन संकट का मुद्दा उठा। हयाशी के साथ भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए ओकानो ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि यूक्रेन पर जी-7 का रुख नहीं बदलेगा।

उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हमारा रुख जी-7 देशों जैसा ही रहेगा, चाहे हम किसी भी मंच पर यूक्रेन के संबंध में अपनी चिंताओं और अपनी आपत्तियों को उठाएं।' ओकानो ने कहा, 'जब संयुक्त विज्ञप्ति की बात आती है, तो यह वास्तव में अध्यक्ष पर निर्भर करता है कि आम सहमति पर कैसे पहुंचा जाए। इसलिए मैं आगे के रास्ते पर टिप्पणी नहीं करना पसंद करूंगा। यह भारतीय अध्यक्षता के हाथों में है।'
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जापान की अध्यक्षता में मई में हिरोशिमा में जी-7 शिखर सम्मेलन हुआ था। शिखर सम्मेलन में जी-7 नेताओं ने यूक्रेन पर रूस के अवैध, अनुचित और अकारण आक्रमण के खिलाफ खड़े होने का संकल्प लिया और मास्को पर नए प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। जी-20 की विज्ञप्ति के मसौदे में यूक्रेन संघर्ष पर दो पैराग्राफ जी-20 के 'नेताओं' के बाली घोषणापत्र से लिए गए हैं, जिसे पिछले साल नवंबर में जारी किया गया था।

रूस और चीन दोनों बाली घोषणापत्र में यूक्रेन संघर्ष पर दो पैराग्राफ पर सहमत हुए थे, लेकिन वे इस साल इससे पीछे हट गए, जिससे भारत के लिए इस पेचीदा मुद्दे पर आम सहमति बनाने में मुश्किलें पैदा हो गईं। G20 आम सहमति के सिद्धांत के तहत काम करता है। 

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