केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने शुक्रवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बावजूद आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा की संस्था फलाह-ए-इंसानियत अब भी इंटरनेट पर सक्रिय है। उन्होंने कहा कि भारत की जांच में सामने आया है कि आतंकी संगठन आईएसआईएस इंटरनेट के जरिए दहशतगर्दों की भर्तियां कर रहा है।
मेलबर्न में आयोजित ‘नो मनी फॉर टेरर’ सम्मेलन में उभरती तकनीकी और आतंकी वित्तपोषण के खतरों संबंधी विषय पर गोल मेज चर्चा में रेड्डी ने आतंकी वित्त पोषण के लिए क्रिप्टोकरंसी के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, क्रिप्टोकरंसी अपने छद्म नाम, इंक्रिप्शन, वैश्विक पहुंच और कम लागत के कारण आतंकियों को इसके विशिष्ट लाभ मिलते हैं।
रेड्डी ने सभी मौजूद सदस्यों को भरोसा दिलाया कि भारत सरकार वित्तीय कार्य टास्क फोर्स के मानकों को लागू करने और आतंकवाद-रोधी नेटवर्क को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। नो मनी फॉर टेरर सम्मेलन में दुनिया के 65 देश शामिल हुए हैं। गृह राज्यमंत्री भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, एनआईए महानिदेशक वाईसी मोदी भी इसका हिस्सा हैं।
आतंकी कर रहे छद्म संगठनों का इस्तेमाल
रेड्डी ने कहा, दूसरे देशों में बैठे आतंकी भारत के गैर लाभकारी संगठनों जैसे छद्म संगठनों के जरिये पैसा भेजकर आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद मुहैया करा रहे हैं। इस पैसे को चैरिटी के नाम पर संस्थाओं को दिया जाता है। इन संगठनों के जरिये युवाओं को भड़काया जा रहा है और इनका इस्तेमाल दहशत फैलाने के लिए किया जाता है। रेड्डी ने इस संदर्भ में जाकिर नाईक के प्रतिबंधित संगठन आईआरएफ का जिक्र किया।