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फ्यूचर समूह को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के तीन आदेश खारिज किए, नए सिरे से विचार का निर्देश

Tue, 01 Feb 2022 01:04 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मामले में 11 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने फ्यूचर ग्रुप की अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखा था। उसे यह तय करना था कि क्या फ्यूचर ग्रुप को फ्यूचर रिटेल लिमिटेड की संपत्ति बिक्री सौदे के लिए नियामक मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी रखने की इजाजत दी जा सकती है?
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने फ्यूचर-अमेजन विवाद को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में पारित तीन आदेशों को खारिज कर दिया। इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी मुद्दों पर फिर से विचार करने के लिए केस को हाईकोर्ट भेज दिया है। इससे फ्यूचर समूह को बड़ी राहत मिल गई है। 

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मामले में 11 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने फ्यूचर ग्रुप की अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखा था। उसे यह तय करना था कि क्या फ्यूचर ग्रुप को फ्यूचर रिटेल लिमिटेड की संपत्ति बिक्री सौदे के लिए नियामक मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी रखने की इजाजत दी जा सकती है?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज मामलों में से एक सिंगापुर की मध्यस्थता कोर्ट के अंतिम फैसले पर रोक से हाईकोर्ट द्वारा रोक से इनकार करने का मामला भी शामिल था।  मध्यस्थता कोर्ट ने फ्यूचर रिटेल लि. को रिलायंस रिटेल के साथ 24,731 करोड़ रुपये के विलय सौदे पर आगे बढ़ने से रोक दिया था 
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सीजेआई जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने फ्यूचर समूह को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट का पिछले साल 2 फरवरी का आदेश खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने इस आदेश में फ्यूचर रिटेल लि. (FRL) को विलय के करार को लेकर यथास्थिति का आदेश दिया था। इसके अलावा हाईकोर्ट ने गत वर्ष 18 मार्च के आदेश में मध्यस्था कोर्ट के आपात आदेश (EA) को कायम रखते हुए फ्यूचर समूह व उसके निदेशकों पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। उसे भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। शीर्ष कोर्ट ने 29 अक्तूबर 2021 का वह आदेश भी खारिज कर दिया, जिसमें सिंगापुर की अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कोर्ट (SIAC) के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया गया था। 

ईए में एफआरएल को विलय करार पर आगे बढ़ने से रोक दिया था। सीजेआई रमण ने कहा कि वह दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह करेंगे कि वह मामले की जल्दी सुनवाई के लिए पीठ गठित करें।
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