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एफटीटीआई की विदाई की तैयारी में सरकार, डिजिटल मीडिया यूनिवर्सिटी में बदलने पर हो रहा है विचार

Tue, 31 May 2016 05:56 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
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करीब एक साल पहले पुणे स्थित फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टट्यूट (एफटीटीआई) के अध्यक्ष बने गजेन्द्र चौहान देश के इस प्रतिष्ठित संस्थान में एक बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है। इस संस्थान की स्थापना जिन उद्देश्यों के साथ हुई थी उसमें बदलाव लाते हुए प्रशासन इसे एक 'डिजिटल मीडिया विश्वविद्यालय' में बदलने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।
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यह प्रस्ताव संस्थान के गवर्निंग काउंसिल के उपाध्यक्ष बी.पी.सिंह ने रखा था। इस प्रस्ताव पर एकेडमिक काउंसिल की 1 जून को होने वाली बैठक में चर्चा होगी। इस नयी योजना में एफटीटीआई में नौ अलग 'स्कूल' बनाने का प्रस्ताव है, जिसमें फिल्म, टेलिविजन, रेडियो, डिजिटल गेमिंग आदि से जुड़े 22 पाठ्यक्रम होंगे। इन पाठ्यक्रम में लंबी अवधि के कोर्सेज के साथ-साथ छोटे अवधि के कोर्सेज भी शामिल है। 

इस नए प्रस्ताव की योजना, संस्थान के पुराने उद्देश्यों में बिना किसी परिवर्तन लाए नए उद्देश्यों को शामिल करना है। अतीत में, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के छात्रों और पुराछात्रों ने सरकार और प्रशासन द्वारा संस्थान में बड़े बदलाव लाने का पुरजोर विरोध किया था। 1 जून को एकेडमिक काउंसिल की होने वाली बैठक में अगर यह प्रस्ताव पारित हुआ तो इसे सूचना और प्रसारण मंत्रालय के समक्ष भेज दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक सूचना और प्रसारण मंत्रालय पहसे ही इस बदलाव के लिए औनपचारिक रुप से हामी भर चुका है।
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नए प्रस्तावित पाठ्यक्रम के मुताबिक एफटीटीआई अब छात्रों को मीडिया मैनेजमेंट एंड रिसर्च, ब्राडकॅास्ट जर्नलिज्म, एडर्वटाइजिंग, म्यूजिक कंपोजिंग, इंटरनेट मीडिया और वीडियो गेम्स, रेडियो प्रोग्राम प्रोडक्शन में एमबीए की डिग्री देगा। यह पाठ्यक्रम नौ अलग स्कूलों, स्कूल आफ मीडिया मैनेजमेंट एंड कम्यूनिकेशन, स्कूल आफ परफार्मिंग आर्टस, स्कूल आफ एडर्वटाइजिंग, स्कूल आफ मीडिया प्रोडक्शन, आदि से चलाए जाएंगे।

प्रत्येक पाठ्यक्रम में 15-20 छात्र होंगे जिसमें 30 फीसदी सीटें दक्षिण एशिया और अफ्रीका के छात्रों के लिए आरक्षित होंगी। एफटीटीआई प्रशासन का कहना है कि इन नए पाठ्यक्रमों से एफटीटीआई को ज्यादा आमदनी होगी और संस्थान वित्तीय रुप से आत्मनिर्भर होगा।

हालांकि अभी तक दस्तावेजों में यह नहीं बताया गया है कि ये पाठ्यक्रम कैसे संचालित होंगे। संस्थान के पास इस वक्त इन पाठ्यक्रमों के लिए ना ही आवश्यक शिक्षक है ना ही आधारभूत सुविधांए।
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