एफएसएसएआई का कहना है कि देश में मिलने वाला 90 फीसदी दूध पीने योग्य है। बाकी बचे 10 फीसदी दूध में ऑक्सी-टेट्रासाइक्लिन की मात्रा पाई गई है। इसके अलावा 3 प्रतिशत दूध में अमोनियम सल्फेट की मात्रा मिली है। एफएसएसएआई का कहना है कि देश में केवल 20 फीसदी ही प्रसंस्कृत दूध बेचा जा रहा है।
नेशनल मिल्क सर्वे 2018 की अंतरिम रिपोर्ट जारी करते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई के सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि मई से अक्टूबर तक 29 राज्यों 7 केंद्रशासित प्रदेशों और 1100 कस्बों से दूध के 6,432 सैंपल लिए गए थे। उन्होंने बताया कि केवल 10 फीसदी 638 नमूने ऐसे थे, जिनमें मिलावट पाई गई। वहीं 90 फीसदी नमूने उपयोग के लिए सुरक्षित पाए गए।
उन्होंने बताया कि 6,432 दूध के नमूनों में से 12 में ही मिलावट पाई गई, जबकि केवल 1.2 प्रतिशत नमूनों में तय मात्रा से ज्यादा एंटी-बायोटिक के अवशेष मिले। जिसकी मुख्य वजह ऑक्सी-टेट्रोसाइक्लिन है, जो जानवरों में बोवाइन मास्टिटिस का इलाज करने में प्रयोग की जाती है। उन्होंने बताया कि सर्वे में दूध में 13 तरह की मिलावट का परीक्षण भी किया गया, जिसमें वनस्पति तेल, डिटर्जेंट, ग्लूकोज, यूरिया और अमोनियम सल्फेट शामिल हैं।