बाजार से खरीदी जाने वाली मिठाई में कितना खोया, दूध, चीनी और दूसरी सामग्री होनी चाहिए, जल्द ही इसका एक समान मानक तय हो सकता है। संसदीय समिति ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को मिठाइयों की संरचना के लिए स्पष्ट मानक तैयार करने और पूरे साल खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच करने का सुझाव दिया है। महाराष्ट्र एफडीए प्रमुख तुकाराम मुंढे की ओर से दिए गए सुझावों पर भी समिति ने चर्चा की है।
मुंढे ने दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावट रोकने समेत 25 सिफारिशें दी हैं। समिति ने पशु आहार को भी निगरानी के दायरे में लाने की जरूरत बताई है। तर्क है कि पशु क्या खा रहे हैं, उसका सीधा असर दूध की गुणवत्ता पर पड़ता है। यानी दूध की शुद्धता की जांच के साथ पशु आहार की गुणवत्ता पर भी नजर रखने की जरूरत है।
पनीर के नाम पर नहीं बिकेंगे गैर दुग्ध उत्पाद टोफू पर कड़ी नजर
दूध से नहीं बने किसी उत्पाद को अब पनीर नाम से बेचना, पैकेट पर पनीर लिखना या पनीर के तौर पर प्रचार पर रोक होगी। पनीर में मिलावट रोकने को लिए एफएसएसएआई ने नए नियमों का मसौदा जारी किया है। इसके मुताबिक सोया, पाम तेल, वनस्पति वसा या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री से पनीर जैसा दिखने वाला उत्पाद तैयार किया गया है तो उसे पनीर नहीं कहा जा सकेगा। सोया से बने टोफू पर कड़ी नजर है। अब इस पर लोगों से मिलने वाले सुझावों का इंतजार है। इसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।