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पोक्सो अदालत: विपरीत लिंग की दोस्त होने का मतलब यह नहीं कि वह यौन इच्छा को संतुष्ट करने के लिए उपलब्ध है 

Thu, 23 Dec 2021 03:57 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पोक्सो अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी अपने कृत्य के परिणाम को समझ गया है, इसलिए उसे अधिकतम सजा देना आवश्यक नहीं था। 
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अदालत का फैसला - फोटो : social media
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विस्तार
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पोक्सो अदालत ने कहा कि विपरीत लिंग का दोस्त होने का मतलब यह नहीं है कि वह यौन इच्छा को संतुष्ट करने के लिए उपलब्ध है। अदालत ने 20 साल के आरोपी को अपने 13 वर्षीय दोस्त और दूर की रिश्तेदार से दुष्कर्म के आरोप में 10 साल की जेल की सजा सुनाई है। इसमें कहा गया है कि ऐसा अपराध करके दोषी ने लड़की के जीवन में तबाही मचा दी है और इतनी कम उम्र में खुद का जीवन बर्बाद कर लिया। 

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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेष न्यायाधीश प्रीति कुमार घुले ने कहा कि आरोपी की सजा आज के युवाओं को एक संदेश देगी, जो आरोपी के आयु वर्ग में आते हैं। संतुष्टि के लिए बेकाबू इच्छा वासना उनके भविष्य, करियर और प्रगति के सुनहरे दौर को खराब कर सकती है।

पीड़िता का भविष्य भी अंधकार में
अदालत ने कहा कि भविष्य की प्रगति की नींव युवाओं के शुरुआती दिनों में तैयार होती है, चाहे वह किसी भी लिंग का हो। जज ने कहा, इस मामले में आरोपी द्वारा किए गए अपराध के कारण आरोपी के साथ-साथ पीड़िता का भविष्य भी अंधकार के साये में आ गया है। अदालत ने कहा कि आरोपी अपने कृत्य के परिणाम को समझ गया है, उसे अधिकतम सजा देना आवश्यक नहीं था। 
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अदालत ने कहा कि नाबालिग पीड़िता जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण की योजनाओं के तहत मुआवजे की हकदार है। साथ ही कहा कि दोषी के कृत्य के कारण नाबालिग की शादी में बाधाएँ आएंगी क्योंकि उसकी सगाई पहले ही टूट चुकी है।

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