'नटवरलाल' सीआरपीएफ के जी का जंजाल बन गए हैं। ये वही नटवरलाल हैं जो पुलवामा में देश के लिए अपनी जान देने वाले सीआरपीएफ के शहीदों के परिजनों को अपना निशाना बना रहे हैं। ये नटवरलाल सीआरपीएफ की वर्दी पहनकर आते हैं और शहीदों के परिजनों को अपनी बातों में उलझाकर उन्हें लूट लेते हैं। ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। सीआरपीएफ यह मालूम नहीं कर पा रही है कि वह नटवरलाल फोर्स का ही कोई कर्मी है या कोई बाहरी व्यक्ति वर्दी पहनकर सीआरपीएफ को बदनाम कर रहा है। इस बार सीआरपीएफ ने कुछ फोटोग्राफ हर यूनिट में भेजे हैं। बल का हर जवान फोटो को देखकर यह बताएगा कि नटवरलाल उनके आसपास तो नहीं है। फ्रॉड के ऐसे मामलों से बचने के लिए शहीदों के परिजनों को भी कुछ हिदायतें दी गई हैं।
बता दें कि पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों के परिजनों को सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों से जो राशि मिली है, वह प्रति परिवार एक करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है। कई जगहों पर शहीदों के परिजनों को राज्य सरकारों ने नौकरी भी दी है। इसी जानकारी का फायदा उठाकर नटवरलाल सक्रिय हो गए। फ्रॉड करने में माहिर ये लोग सीआरपीएफ की वर्दी पहनकर शहीद के घर पहुंच जाते हैं। जब उनसे यह पूछा जाता है कि वे कहां से आए हैं तो जवाब मिलता है सीआरपीएफ मुख्यालय से। इससे पहले कि उनसे कोई और बातचीत की जाए, नटवरलाल बड़ी विनम्रता से बोल उठते हैं। आपके नाम कुछ पैसा आया है, बस उसी की औपचारिकताएं पूरी करनी हैं। वह आधारकार्ड, पैन कार्ड, बैंक डिटेल और पासबुक आदि देने के लिए कहता है। वह यह भी पूछ लेता है कि आप लोगों ने पैसा कहां लगाया है। क्या वह बैंक में है या कोई पॉलिसी ली है, आदि जानकारी ले लेता है। इसके बाद वह कुछ कागजात पर साइन कराता है। थोड़ी देर के लिए बैंक में जाने की बात कह कर घर से निकल जाता है। एक घंटे बाद वह फिर से लौटकर आता है। कहता है, आप इतने रुपये जमा करा दें ताकि सारी राशि आपके खाते में आ सके। शहीद के परिजन कहते हैं कि इतने रुपये तो नहीं हैं। नटवरलाल कहता है, ठीक है चेकबुक लेकर बैंक में चलो। शहीद के भोले-भाले परिजन कुछ नहीं समझ पाते और उसके पीछे हो लेते हैं। वे बैंक से पैसे निकलवाकर दे देते हैं। नटवरलाल उन्हें घर छोड़ने की बात कहता है। बीच रास्ते में वह गच्चा देकर कहीं निकल जाता है।
नटवरलाल एक ही तरीका से करता है ठगी
सबसे पहले पटियाला में पुलवामा के शहीद के परिजनों के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। शहीद कुलविंद्र सिंह के परिजनों से उक्त तरीका अपनाकर डेढ़ लाख रुपये ठग लिए। इसके बाद यूपी के आजमगढ़ जिले में भी ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है। वहां भी पिछले दिनों निजामाबाद थाना क्षेत्र के गांव गौसतुरघूरी में शहीद शिनोद के माता-पिता के साथ नटवरलाल खेल कर गया। वह एक लाख 20 हजार रुपये लेकर चंपत हो गया। दोनों ही मामलों में नटवरलाल सीआरपीएफ कर्मी के वेश में पहुंचा था। बोला, विभाग की तरफ से कुछ रुपया आया हुआ है, जो शहीद के परिवार को मिलना है। हालांकि शिनोद कुमार बिहार के औरंगाबाद में नक्सलियों के साथ एक मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। इनके अलावा पुलवामा के तीन शहीदों के परिजनों के यहां भी नटवरलाल पहुंचे हैं। हालांकि वे समय रहते सचेत हो गए और धोखाधड़ी का शिकार होने से बच गए, लेकिन नटवरलाल हाथ नहीं लग सका। बुधवार को यूपी पुलिस ने आगरा के रहने वाले एक आरोपी को पकड़ा है। उसने स्वीकार किया है कि शहीद कुलविंद्र के मां-बाप को लूटने वाला वही है। रोपड़ पुलिस अब पूछताछ के लिए हरेंद्र को रिमांड पर लेगी।
पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, शहीद की प्रतिमा और पैसा डबल करने का देते हैं झांसा
सीआरपीएफ ने शहीदों के परिजनों को हिदायत दी है कि अगर उनके पास कोई व्यक्ति, जिसने वर्दी पहन रखी है आता है तो सबसे पहले उसका पहचान पत्र देखें। अगर वह पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी दिलाने की बात कहे तो चुपके से सीआरपीएफ के नोडल अधिकारी को बताएं। शहीद की प्रतिमा लगाने के लिए पैसा मांगे या उनका पैसा पॉन्जी स्कीम में लगाकर डबल करने का झांसा दे तो भी तुरंत संबंधित अधिकारी को फोन करें। अपने मोबाइल कैमरे से ऐसे व्यक्ति का फोटो खींच लें। उसका पहचान पत्र देखें। अगर इसके बाद भी वह किसी योजना की बात करे या पैसा डबल करने का भरोसा दे तो फौरन सीआरपीएफ की हेल्पलाइन पर संपर्क करें। फिलहाल सीआरपीएफ ने अपनी सभी यूनिटों में ऐसे कई नटवरलाल के फोटो भेजकर जवानों से उन्हें पहचानने के लिए कहा गया है। इसके अलावा शहीदों के सभी परिजनों के पास भी ऐसे फोटो भेजकर उन्हें आगाह किया जा रहा है कि ऐसे किसी व्यक्ति को अपने घर पर देखें तो सीआरपीएफ को सूचित करें।