जालंधर के बिशप फ्रैंको मुलक्कल, जिनपर दुष्कर्म के आरोप लगने के बाद 2018 में अस्थायी रूप से कर्तव्यों से मुक्त कर दिया गया था। उन्होंने अब अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उनके इस्तीफे के बाद अब नए बिशप के नाम पर चर्चा की जाएगी। वेटिकन ने बिना कोई और जानकारी दिए गुरुवार को इस फैसले की घोषणा की।
फ्रैंको मुलक्कल को 2013 में पंजाब राज्य में जालंधर का बिशप नियुक्त किया गया था। उन्होंने 2018 में पद से अस्थायी रूप से इस्तीफा दे दिया था जब एक नन ने उन पर कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। हालांकि पिछले साल केरल की एक स्थानीय अदालत ने दुष्कर्म के मामले में बरी कर दिया था।
मुलक्कल ने इस साल 8 फरवरी को पोप से मुलाकात की थी और दुष्कर्म मामले में कोट्टायम की अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायालय द्वारा बरी किए जाने के बाद पोप के साथ यह उनकी पहली मुलाकात थी। सितंबर 2018 में, मुलक्कल से केरल पुलिस द्वारा एक नन द्वारा लगाए गए दुष्कर्म के आरोपों पर पूछताछ के बाद पोप फ्रांसिस द्वारा बिशप को जालंधर की अपनी जिम्मेदारियों से अस्थायी रूप से मुक्त कर दिया गया था।
सनसनीखेज मामले में स्थानीय अदालत से बरी होने के बावजूद इसके बाद मुलक्कल को चर्च में कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गई। वेटिकन ने पहले उन्हें दुष्कर्म के आरोपों से बरी करने के अदालत के फैसले को स्वीकार कर लिया था। हालांकि मुलक्कल के बरी हो जाने के बाद नन ने मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ केरल उच्च न्यायालय का रुख किया है।
मुलक्कल पर 2014 और 2016 के बीच कोट्टायम के एक कॉन्वेंट में अपनी यात्रा के दौरान कई बार नन के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था, जब वह जालंधर सूबे के बिशप थे। नन मिशनरीज ऑफ जीसस की सदस्य हैं, जो जालंधर सूबे के तहत एक डायोकेसन कलीसिया है।