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शांति समझौता: असम में चार दशक लंबे उल्फा उग्रवाद का अंत, 1991 से कई बार हुए थे बातचीत के प्रयास

Sat, 30 Dec 2023 05:58 AM IST
गुलाम अहमद अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

उग्रवादी संगठन के साथ 1991 के बाद से ही बातचीत के कई प्रयास किए गए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इस त्रिपक्षीय समझौते में भले ही परेश बरुआ का गुट उल्फा (आई) शामिल नहीं हुआ है, यह एक बड़ी सफलता और संबंधित हितधारकों के साथ प्रतिबद्धता का दस्तावेज है। 
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ULFA faction signed Peace Accord - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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असम शांति समझौता पूर्वोत्तर, खासकर राज्य में अमन चैन की व्यवस्था कायम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह समझौता ने उल्फा उग्रवाद के 44 वर्षों से भी अधिक लंबी यात्रा में एक अहम अध्याय है। समसामयिक असम में लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले कई मील के पत्थर देखे गए हैं, लेकिन उल्फा मुद्दा, जो शुरू में एक आंदोलन के रूप में शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही अपहरण, जबरन वसूली, हत्याओं और बम विस्फोटों के साथ सशस्त्र संघर्ष में बदल गया, शीर्ष पर बना रहा। कई विवादास्पद मुद्दे जिनका समाधान आवश्यक था।

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उग्रवादी संगठन के साथ 1991 के बाद से ही बातचीत के कई प्रयास किए गए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इस त्रिपक्षीय समझौते में भले ही परेश बरुआ का गुट उल्फा (आई) शामिल नहीं हुआ है, यह एक बड़ी सफलता और संबंधित हितधारकों के साथ प्रतिबद्धता का दस्तावेज है। उल्फा का गठन 7 अप्रैल, 1979 को ऊपरी असम जिलों के 20 युवाओं के एक समूह ने शिवसागर के ऐतिहासक अहोम-युग के एम्फीथिएटर रंग घर में किया था।

समूह ने कई मौकों पर बातचीत की इच्छा जताई थी लेकिन संप्रभुता पर अपने रुख पर अड़े रहा। लेकिन, 2011 में संगठन में दूसरी बार विभाजन हुआ और अरबिंद राजखोया समेत कुछ शीर्ष नेताओं ने अपना अलग गुट बना लिया। राजखोवा और उनके समर्थक पड़ोसी देश से असम लौटे और संप्रभुता की मांग को छोड़कर बिना किसी शर्त के वार्ता की मेज पर लौटे। इससे पहले, 1992 में गुट में विभाजन हुआ था और बातचीत का समर्थन करने वाले नेता अलग हो गए थे। लेकिन तब राजखोवा और बरुआ संप्रभुता की मांग पर अड़े रहे।
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असम के लिए आर्थिक आशावाद का क्षण
असम के लिए ऐतिहासिक और सामाजिक-आर्थिक आशावाद का क्षण। उल्फा के साथ शांति एक पुनर्जीवित, शांतिपूर्ण और जीवंत असम के लिए 'मोदी की गारंटी' की पुष्टि करती है। यह समझौता न सिर्फ लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे का समाधान करता है, बल्कि असम को नए रास्ते तलाशने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान करने का अवसर भी प्रदान करता है। - सर्बानंद सोनोवाल, केंद्रीय मंत्री

इन मुद्दों पर सहमति

  • असम की सांस्कृतिक विरासत बरकरार रहेगी।
  • रोजगार के बेहतर साधन उपलब्ध होंगे।
  • भारत सरकार उल्फा कैडर के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर देगी।
  • उल्फा सदस्यों को मुख्यधारा में लाएंगे।
  • उल्फा के 750 और उग्रवादियों के समर्पण के साथ ही ऐसा करने वालों की संख्या 8,250 हो जाएगी।


अब तक 10 हजार लोगों ने गंवाई जान  
गृह मंत्री शाह ने कहा, 1979 से उल्फा की ओर से जारी हिंसा में असम के 10,000 लोगों को जान गंवानी पड़ी। हालांकि, कुछ समय से हिंसा में 87 फीसदी की कमी के साथ मौतों में 90 फीसदी और अपहरण की वारदात में 84 फीसदी कमी आई है। समझौते के तहत असम को विकास के लिए एक बड़ा पैकेज दिया जाएगा। सीएम हिमंत बिस्वसरमा ने कहा, यह ऐतिहासिक दिन है। इस समझौते से राज्य में स्थायी शांति कायम होगी।  

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