डीसीजीआई ने कहा कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि खुद गाम्बिया ने माना है कि खांसी की सिरप के सेवन और बच्चों की मौतों के बीच अभी तक कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं किया गया है। साथ ही जिन बच्चों की मृत्यु हुई थी, उन्होंने इस सिरप का सेवन नहीं किया था।
दक्षिण अफ्रीकी देश गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत मामले में डब्ल्यूएचओ के दावे को भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल (डीसीजीआई) डॉ वी जी सोमानी ने गलत करार दिया है। उन्होंने इस बाबत डब्ल्यूएचओ के निदेशक डॉ. रोजेरियो गैस्पर को एक पत्र भी लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि गांबिया में बच्चों की मौत मामले में डब्ल्यूएचओ द्वारा अक्टूबर में जारी एक बयान दुर्भाग्यपूर्ण रूप से जारी किया गया था। इसके कारण वैश्विक मीडिया ने भारतीय फार्मास्युटिकल उत्पादों की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निशाना बनाया।
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डीसीजीआई ने कहा कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि खुद गाम्बिया ने माना है कि खांसी की सिरप के सेवन और बच्चों की मौतों के बीच अभी तक कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं किया गया है। साथ ही जिन बच्चों की मृत्यु हुई थी, उन्होंने इस सिरप का सेवन नहीं किया था।
की गई व्यापक जांच
गांबिया में 66 बच्चों की मौत से जुड़े भारत में निर्मित चार कफ सिरप के नमूनों की जांच के बारे में भी डॉ वी जी सोमानी ने पत्र में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि यहां की सरकारी प्रयोगशाला में इन नमूनों की जांच की गई। जांच के नमूने निर्देशों के अनुरूप पाए गए हैं। ये रिपोर्ट डब्ल्यूएचओ से प्राप्त रिपोर्ट और इन मौतों के मामले में विवरण की जांच और विश्लेषण के लिए गठित विशेषज्ञों की तकनीकी समिति को उपलब्ध करा दी गई हैं।
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भारत मे भेजा कई बार रिमांइडर
डीसीजीआई ने डब्ल्यूएचओ के साथ पूर्ण सहयोग और सहयोग को दोहराते हुए कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) पहले ही डब्ल्यूएचओ के साथ सारी जानकारी साझा कर चुका है। इसमें उन्होंने यह भी कहा है कि इस मामले में जांच के लिए भारत ने डब्ल्यूएचओ से कई बार जानकारी के लिए अनुरोध किया। 15, 20, 29 अक्टूबर को डब्ल्यूएचओ को इस बाबत रिमांइडर भेजा गया। हर बार डब्ल्यूएचओ ने कहा कि वे केस असेसमेंट को संभालने वाली अपनी टीम के संपर्क में हैं और जल्द से जल्द जानकारी साझा करेंगे। लेकिन डब्ल्यूएचओ द्वारा सीडीसीएसओ के साथ अब तक कोई जानकारी का आदान-प्रदान नहीं किया गया है।
संसद में सरकार ने दी जानकारी
वहीं दूसरी ओर, सरकार ने संसद में भी इस मामले में जानकारी दी है। सरकार ने कहा कि मेडेन फार्मास्यूटिकल्स की खांसी की दवाई के नमूने मानक गुणवत्ता वाले पाए गए हैं। रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा ने 13 दिसंबर को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में इस मामले में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने राज्य औषधि नियंत्रक के सहयोग से सोनीपत में मेडेन फार्मास्यूटिकल्स की एक संयुक्त जांच की थी।