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Venkaiah Naidu: पूर्व उपराष्ट्रपति नायडू ने एक साथ चुनाव कराने का किया समर्थन, भारत पर छिड़ी बहस पर कही ये बात

Wed, 06 Sep 2023 07:18 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश के पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बुधवार को कहा कि देश को संसद और विधानसभा दोनों के लिए एक साथ चुनाव कराने की जरूरत है क्योंकि बार-बार चुनाव होने से देश की प्रगति बाधित होती है।
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Venkaiah Naidu - फोटो : Social Media
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विस्तार
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देश में इन दिनों एक साथ चुनाव कराने को लेकर चर्चाएं काफी तेज हैं। विपक्षी पार्टियों ने सरकार के इस सुझाव की कड़ी आलोचना की है। वहीं, देश के पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बुधवार को कहा कि देश को संसद और विधानसभा दोनों के लिए एक साथ चुनाव कराने की जरूरत है क्योंकि बार-बार चुनाव होने से देश की प्रगति बाधित होती है।

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उन्होंने कहा कि एक चुनाव कराने से सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ कम होगा। उनका मानना है कि इस विषय पर गहन और सार्थक बहस होनी चाहिए। आगे बोले कि "चुनाव आयोग की सिफ़ारिशों, विधि आयोग की सिफारिशों, संसदीय स्थायी समितियों की सिफारिशों के अनुसार चलना और लागत-बचत द्वारा भी निर्देशित होना, मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि हमें 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के सिद्धांत पर चलना चाहिए''।

'इंडिया' के बजाय 'भारत' नाम का उपयोग करने में कुछ भी गलत नहीं
वह अपने आवास पर मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रहे थे, इस दौरान उन्होंने कहा कि 'इंडिया' के बजाय 'भारत' नाम का उपयोग करने में कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि देश को प्राचीन काल से भारत के नाम से जाना जाता था। पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि हमें लोकतंत्र में अनावश्यक विवादों से बचना चाहिए। कभी-कभी मतभेद होते हैं। लेकिन बहस के बाद, हमें आम सहमति बनानी चाहिए, फिर आगे बढ़ना चाहिए।
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विधायकों के एक पार्टी से दूसरे पार्टी में जाने के बारे में बोलते हुए वेंकैया नायडू ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे के समाधान के लिए दल-बदल विरोधी कानून में संशोधन किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, 1971 तक संसद और राज्य विधानसभाओं दोनों के लिए एक साथ चुनाव होते थे। हालांकि, बाद में विभिन्न कारणों से यह प्रथा समाप्त हो गई। पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से मौजूदा सरकारें लोगों के व्यापक हित में ठोस फैसले नहीं ले पाएंगी।

पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि संविधान में पहले से ही 'इंडिया, दैट इज भारत...' का उल्लेख है। नायडू ने कहा कि संविधान सभा में ही इतनी बहस और चर्चा हुई थी और ये दोनों (इंडिया और भारत) परस्पर विनिमय योग्य हैं। भारत का उपयोग प्राचीन काल से किया जाता रहा है। भारत नाम इस्तेमाल करने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 'इंडिया' शब्द इसलिए प्रचलन में आया क्योंकि इसका नाम विदेशियों ने रखा था। अन्यथा सांस्कृतिक रूप से देश को भारत के नाम से जाना जाता है।

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