फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शशांक: अमेरिका के फैसले से बदलता जाएगा देश का नरेटिव

Tue, 22 Aug 2017 01:20 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
विज्ञापन
PM MODI And DONALD TRUMP
विज्ञापन
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से एक कदम आगे जाकर भारत को सामरिक साझेदारी के खास देश का दर्जा देने की तैयारी में है। अमेरिका से लौटे पूर्व विदेश सचिव शशांक के अनुसार यह फैसला भारतीय समयाअनुसार सोमवार की रात में हो सकता है।
विज्ञापन


शशांक के मुताबिक भारत सरकार भी इस दर्जे के मिलने के प्रति करीब-करीब आश्वस्त है। बतौर शशांक इस दर्जे के मिलने के बाद भारत नये तरीके से अपने तेवर दिखा सकता है।अमेरिका चाहता है कि भारत को महत्वपूर्ण सामरिक और रणनीतिक साझीदार के क्लब में रखा जाए।

एशिया और दक्षिण एशिया में उसे अमेरिका का शीर्ष सहयोगी देश बनाया जाए। पूर्व विदेश सचिव का मानना है कि ऐसा होने के बाद भारत को जहां अमेरिका से अत्याधुनिक रक्षा साजो-सामन, तकनीक, व्यापार के अवसर मिलेंगे, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार नया नरेटिव बदलने में कामयाब हो जाएगी।
विज्ञापन


भारत सरकार को उम्मीद है कि अमेरिका के इस कदम के बाद डोकलाम में चीन के साथ जारी गतिरोध और युद्ध जैसी संभावना में परिवर्तन देखने को मिलेगा।

अटल-मनमोहन का दौर खत्म

modi trump
शशांक का कहना है कि चीन और पाकिस्तान के साथ विश्वास बहाली का पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह वाला दौर खत्म हो चुका है। भारत सरकार विदेश नीति का नया पैमाना गढक़र नरेटिव बदलने की कोशिश में है।

यह सब राष्ट्रवाद की भावना के तहत हो रहा है। इसलिए आतंकवाद, कश्मीर, चीन और पाकिस्तान के साथ अभी तक की चली आ रही परंपरा के अनुसार व्यवहार होने की संभावना कम है। पूर्व विदेश सचिव का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत इसी तरह की नीतियों पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। 

क्या चीन से होगा युद्ध?
पूर्व विदेश सचिव कहते हैं कि इसकी संभावना तो क्षीण है, लेकिन देश का एक वर्ग 1962 में चीन से हुई हार का बदला लेना चाह रहा है। इस वर्ग को लग रहा है कि युद्ध होने पर राष्ट्रीय सोच से ओत प्रोत नागरिकों में जहां नई संवेदना, भावना, राष्ट्रीयता का संचार होगा, वहीं मौजूदा सरकार 2019 में होने वाले आम चुनाव में आसानी से सफलता पा लेगी।

देश को अमेरिका, इस्राइल समेत अन्य देशों से उन्नत हथियार मिल जाएंगे। हथियार विक्रेता और बिचौलिया कंपनियों को कमीशन भी मिलेगा। पूर्व विदेश सचिव को लग रहा है कि देश में इस तरह की सोच तेजी से आगे बढ़ रही है।

उनका कहना है कि डोकलाम के गतिरोध पर पहले भारत-चीन के रिश्ते तल्ख हुए, फिर एनएसए की यात्रा के बाद काफी कुछ सामान्य हुआ और अब फिर तनाव का वातावरण बन रहा है। हालांकि इन सबके बीच हर स्तर का कूटनीतिक दांव अजमा रहा है।

तल्खी में आगे निकल चुका है चीन

modi and trump

शशांक का कहना है कि धमकी, चेतावनी, सैनिकों के प्रयास के जरिए चीन भारत के साथ तल्ख रिश्ते में काफी आगे निकल चुका है। चीन, चीन के लोग वहां की सरकार अपने देश की बराबरी अमेरिका से करती है। ऐसे में मामला संवेदनशील हो रहा है। हालांकि शशांक को उम्मीद है कि यदि प्रधानमंत्री ब्रिक्स देशों की बैठक में हिस्सा लेने जाएंगे तो स्थितियां तेजी से बदलेंगी। दोनों देश रिश्ते को सामान्य बनाने का प्रयास करेंगे। खास बात यह भी है कि चीन के श्योमोन शहर ब्रिक्स की बैठक में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन भी होंगे। शशांक का कहना है कि डोकलाम में गतिरोध के बीच रूस ने अपनी स्थिति को अभी तटस्थ बनाए रखा है, लेकिन उम्मीद खत्म नहीं हुई है।

क्या है चीन की मंशा
डोकलाम विवाद का चाहे जो हल निकले, लेकिन फौरी तौर पर चीन भूटान और भारत के रिश्ते में दरार डालना चाहता है। चीन यह प्रयोग उसी तरह करना चाहता है कि जैसे उसने नेपाल और भारत के बीच दूरी पैदा करने में काफी सफलता पाई है। वह भारत और पाकिस्तान के बीच में लगातार दरार बढ़ाने के प्रयास में रहता है। इससे वह जहां भारत के लिए चुनौती बना रहता है, वहीं पड़ोसियों के माध्यम से भारत को कई मोर्चे पर घेरे रखता है।
विज्ञापन

अमेरिका की भारत पर निगाह

modi and trump
अमेरिकी रणनीतिकार भारत को नये स्रोत के रूप में देख रहे हैं। पूर्व विदेश सचिव का कहना है कि वह भारत चीन के बीच में दरार बढ़ाकर जहां अपने सैन्य साजो सामान बेचने की तैयारी में हैं, वहीं एशिया, दक्षिण एशिया में सैन्य संतुलन चाहते हैं।

शशांक का कहना है कि इन सभी बदलावों पर भारत सरकार और एजेंसियों की बारीकी नजर है। इसी को केन्द्र में रखकर रूस, ईरान, चीन, पाकिस्तान अन्य के साथ रिश्ते नया आकार-प्रकार लेने के लिए बढ़ रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें