पटेल चाहते थे कि मुस्लिम समुदाय की सहमति से निपटे मामला
जब स्थिति बिगड़ने लगी तो नेहरु ने उत्तर प्रदेश के सीएम जीबी पंत को टेलीग्राम भेजा। पटेल ने कहा, मौजूदा समय ऐसी घटनाओं के लिए ठीक नहीं है। देश ने अभी एक बंटवारा देखा है। उसके घाव अभी तक भरे नहीं हैं। मेरा मानना है कि किसी भी सूरत में यह मामला बिगड़ना नहीं चाहिए। जहां तक हो सके, इसे मुस्लिम समुदाय की सहमति से निपटाना चाहिए।
किसी पक्ष के खिलाफ कोई दुष्प्रचार न हो। इसके बाद 22 अगस्त 1950 को अक्षय ब्रह्मचारी उपवास पर बैठ गए। 32 दिन बाद उनके पास लाल बहादुर शास्त्री का संदेश आया। शास्त्री ने लिखा था, सरकार ने अयोध्या में अपने सभी प्रयास किए हैं। हम शांति बनाए रखेंगे। यदि कुछ खराब होता है तो हम उसे ठीक करेंगे।
इसमें सभी लोगों को आगे आना होगा और उन्हें अपना सहयोग भी देना पड़ेगा। मूर्तियों को लेकर अयोध्या में तनाव हो गया था। जवाहरलाल नेहरू अयोध्या जाना चाहते थे, लेकिन वे जा नहीं सके। उन्होंने यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद बल्लब पंत से अपनी यात्रा को लेकर कुछ खास बातचीत की थी। बाद में किन्हीं कारणों से वे वहां नहीं जा सके।
जब डीएम से नाराज हो गए थे नेहरु...
तत्कालीन जिला फैजाबाद के डीएम केके नायर की कार्यशैली से जवाहरलाल नेहरू नाराज थे। डीएम, सरकार की बात को दरकिनार कर रहे हैं। नायर से कहा गया था कि वे मूर्तियों को कथित तौर पर मस्जिद से बाहर लाकर कहीं दूसरी जगह स्थापित कर दें। इस बाबत नायर ने कहा था कि इससे दंगे फैल सकते हैं।
अगर सरकार यह काम कराना चाहती है तो उनकी जगह किसी दूसरे अधिकारी को यहां तैनात कर दिया जाए। 26 दिसंबर को पंडित नेहरू ने अयोध्या विवाद पर जीबी पंत को एक टेलीग्राम भेजा। नेहरु ने लिखा, मैं अयोध्या के घटनाक्रम को लेकर परेशान हूं। उम्मीद है कि आप इस मामले का हल रुचि लेकर करेंगे।
5 मार्च, 1950 को फैजाबाद जिला प्रशासन को भेजे एक पत्र में नेहरू ने कहा कि डीएम अपनी ड्यूटी ठीक तरह से नहीं कर रहे हैं। एक डीएम ने गलत व्यवहार किया और राज्य सरकार ने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। नायर ने राज्य सरकार के जरिए प्रधानमंत्री के निर्देश पर काम नहीं करने की बात कह दी।
तत्कालीन यूपी के मुख्य सचिव को भेजे एक पत्र में नायर ने लिखा, अगर सरकार ने किसी भी कीमत पर मूर्तियों को हटाने का फैसला किया है, तो मेरा अनुरोध है कि उससे पहले मुझे वहां से हटा दिया जाए। किसी दूसरे डीएम को वहां लगा दिया जाए।
नायर ने यह भी दावा किया कि विवादित स्थल से मूर्तियों को हटाने से जनता को व्यापक पीड़ा होगी, जिसके परिणामस्वरूप कई लोगों की जानें जा सकती हैं। खास बात है कि नेहरू के पत्र के फौरन बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने डीएम को नहीं हटाया।