नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की एक रिपोर्ट के अनुसार हत्या, दुष्कर्म, लूट और डकैती जैसे गंभीर अपराध के 73.5 फीसदी मामलों में शराब भी एक कारण पाया गया है। यानी अपराधी ने अपराध करने से पूर्व या अपराध के दौरान शराब या किसी अन्य नशीले पदार्थ का सेवन किया। दुष्कर्म जैसे मामले में यह आंकड़ा 87 फीसदी तक है।
सड़क दुर्घटनाओं में शराब सेवन एक बड़ा कारण पाया गया है, लेकिन इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंक एंड ड्राइविंग (सीएडीडी) के 2018 के एक सर्वे में दिल्ली के 72 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया था कि वे शराब पीने के बाद कभी-कभी वाहन चलाते हैं।
वर्ष 2014 में नारकोटिक्स ड्रग्स एक्ट (NDPS Act) के तहत कुल 43,290 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें सबसे ज्यादा 16821 मामले अकेले पंजाब राज्य में रिकॉर्ड किए गए थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 6180, महाराष्ट्र में 5989, तमिलनाडु में 1812, राजस्थान में 1337, मध्यप्रदेश में 1027, गुजरात में 73, गोवा में 61 और सिक्किम में 10 केस दर्ज किए गए थे।
NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में देश में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराध के 3.60 लाख मामले दर्ज किए गए। इसमें 32,559 मामले दुष्कर्म के भी शामिल हैं। यानी लगभग हर 15 मिनट में एक महिला के साथ दुष्कर्म या दुष्कर्म का प्रयास किया जाता है।
इसके पहले 2016 में महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा के मामले 3.38 लाख और 2015 में 3.2 लाख थे। महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा के पीछे शराब को एक बड़ा कारण माना जाता है।
इसी प्रकार सड़क दुर्घटनाओं के मामले में भी शराब को बड़ा कारण माना जाता है। भारत में प्रतिदिन लगभग 1474 सड़क हादसे होते हैं, जिनमें लगभग 400 लोगों की मौत या गंभीर रूप से घायल होते हैं। इस मामले में उत्तर प्रदेश की स्थिति सबसे ज्यादा बुरी है, जहां 2015 में सड़क दुर्घटनाओं में 17666 लोग मारे गए। पूरी दुनिया में नशे के कारण हर साल लगभग 40 लाख लोगों की जान चली जाती है।