उन्होंने कहा, 'जब चुनाव आयोग ने हाल ही में कर्नाटक में चुनाव की घोषणा की और राज्य में योग्य महिला मतदाताओं की संख्या जारी की, तो यह आश्चर्य की बात नहीं थी कि वे कुल मतदाताओं का लगभग पचास फीसदी थीं। भारत के अन्य राज्यों के आंकड़े अलग नहीं हैं। इससे मैंने विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण पर फिर से विचार किया।
10 अप्रैल को जारी एक पत्र में उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि प्रधानमंत्री के रूप में वह 1996 में संसद में महिला आरक्षण विधेयक लाए थे, लेकिन इसे पारित करने में असफल रहे। बाद में 2008 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा किए गए प्रयास भी तार्किक निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे।
देवगौड़ा ने कहा कि दोनों बार जब विधेयक पारित करने का प्रयास किया गया तो सरकारों के पास बहुमत नहीं था और वे अपने गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर थीं। उन्होंने कहा, आपके (मोदी) मामले में आप भाग्यशाली हैं कि आपके पास संसद में बहुमत है और हो सकता है कि आप इसे पारित कराने में सफल हों। उन्होंने आगे कहा, इसलिए मैं आपसे 2024 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण विधेयक पारित करने पर विचार करने का आग्रह करता हूं। 1996 और 2008 में प्रस्तुत विधेयक के मसौदों में उपयुक्त संशोधन किए जा सकते हैं। सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना लैंगिक न्याय के लिए इस महान कदम की सफलता की कुंजी होगी।
उन्होंने कहा कि विधानसभाओं और संसद में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देना एक ऐसा विचार है जिसका समय आ गया है। यह इस विधेयक को लाने और इसे पारित करने के लिए एक प्रतीकात्मक संकेत होगा, क्योंकि हम एक नए और बहुत आधुनिक संसद भवन में परिवर्तित हो रहे हैं। हमारी माताएं और बहनें हमसे बेहतर की हकदार हैं। पूर्व प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि जब भारत जी-20 का नेतृत्व करेगा तो महिला आरक्षण विधेयक पर विचार करने से दुनिया को सकारात्मक संकेत जाएगा। यह दुनिया को बताएगा कि हम अपने लोकतंत्र के बारे में गंभीर हैं और इसे गहरा करना चाहते हैं।
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