1989 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार सारदा चिटफंड मामले की जांच में राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल में थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने इस साल फरवरी में राजीव से पूछताछ भी की थी।
राजीव पर सारदा चिटफंड मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है। एसआईटी अध्यक्ष के तौर पर राजीव ने जम्मू-कश्मीर में सारदा प्रमुख सुदीप्त सेन और उसकी सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि कुमार ने उनके पास मिली एक डायरी को गायब कर दिया था। इस डायरी में उन सभी नेताओं के नाम थे जिन्होंने चिटफंड कंपनी से रुपये लिए थे।
राजीव कुमार ने माओवादियों के खिलाफ अपनी क्षमता साबित की। लालगढ़ आंदोलन के नेता छत्रधर महतो और अन्य माओवादी नेताओं (सितंबर 2009 में) की गिरफ्तारी के पीछे भी राजीव कुमार का दिमाग था।
जब राजीव कुमार कोलकाता पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स के प्रमुख थे तो कथित आतंकवादियों को पकड़ने और नकली मुद्रा रैकेट पर नकेल कसने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने दिल्ली और मुंबई पुलिस एसटीएफ को महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान किए थे।
राजीव कुमार ने अमेरिकी केंद्र पर हमला (2002), खादिम के मालिक का अपहरण (2001), जैसे कई हाई प्रोफाइल मामलों में भी अहम भूमिका निभाई।