भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव अब भारत और चीन के संबंधों पर किताब लिख रही हैं। इसमें भारत-चीन युद्ध, भारत की हार, उसमें नेता, सैन्य अफसरों और अधिकारियों की भूमिका का जिक्र संभव है। किताब का विमोचन वर्ष 2017 में होना है। किताब के माध्यम से सब कुछ साफ-साफ सामने आया तो राजनीतिक भूचाल आएगा।
40 साल की सेवा के बाद रिटायर आईएफएस निरुपमा राव रविवार को आईआईटी कानपुर पहुंचीं और टेक्नोलॉजी इंटरटेनमेंट एंड डिजाइन में हिस्सा लेकर स्टूडेंटों से सीधे संवाद किया। साथ ही कहा कि 22 साल की उम्र (1973) में आईएफएस ज्वाइन किया, फिर भारत-चीन के रिश्तों पर गहन अध्ययन किया।
अब रिटायर होकर किताब ‘द पालिटिक्स ऑफ हिस्ट्री: इंडिया एंड चीन 1949-1962’ लिख रही हूं। दोनों बड़े देश हैं। इनके रिश्तों में खटास कैसे आई, कब क्या हुआ इसका ब्योरा किताब में मिल जाएगा। पूर्व विदेश सचिव इंडियन फारेन पॉलिसी पर भी टीचिंग कर रही हैं।
इसको लेकर अब जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने आईआईटी के छात्रों से आह्वान किया कि एक दूसरे से इंटरैक्शन बढ़ाएं। रिसर्च पर ज्यादा ध्यान दें। चायना के स्टूडेंट इतिहास, सभ्यता और संस्कृति पर रिसर्च करते हैं।
तभी इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी में आगे हैं। पूर्व विदेश सचिव ने सोशल मीडिया का महत्व भी बताया और कहा कि इसकी महत्ता वर्ष 2011 में लीबिया संकट के दौरान समझ में आई। ट्विटर हैंडल की मदद से लिबिया में दूतावास से संपर्क साधा गया था। इसी का नतीजा रहा कि तमाम भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा सका। सोशल मीडिया को कम्युनिकेशन का माध्यम बनाया जा सकता है।