नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा था कि भारत की प्रति व्यक्ति आय 2013-14 में 1,438 अमेरिकी डॉलर से लगभग दोगुनी होकर 2024 में 2,880 अमेरिकी डॉलर हो गई है। इस पर पी चिदंबरम ने कहा कि हम प्रगति का स्वागत करते हैं, लेकिन जब दो सरकारों के प्रदर्शन की तुलना की जाती है तो पूरी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती है।
पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने नीति आयोग के प्रति व्यक्ति आय के दावों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के दौरान भारत की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि मोटे तौर पर सही है, लेकिन यूपीए सरकार में इसकी विकास दर अधिक थी। इससे पहले नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा था कि भारत की प्रति व्यक्ति आय 2013-14 में 1,438 अमेरिकी डॉलर से लगभग दोगुनी होकर 2024 में 2,880 अमेरिकी डॉलर हो गई है।
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पी चिदंबरम ने कहा कि हम प्रगति का स्वागत करते हैं, लेकिन जब दो सरकारों के प्रदर्शन की तुलना की जाती है तो पूरी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के आंकड़े पेश करते हुए चिदंबरम ने कहा कि 2003 में जब यूपीए सत्ता में आई थी, तब भारत की प्रति व्यक्ति आय 543 अमेरिकी डॉलर थी, जो 2013 तक बढ़कर 1,438 अमेरिकी डॉलर हो गई। यानी 10 साल में 2.64 गुना वृद्धि हुई। वहीं एनडीए सरकार के तहत 2014 में 1,438 अमेरिकी डॉलर से 2024 में 2,878 अमेरिकी डॉलर तक की वृद्धि सिर्फ 1.89 गुना है। जो इसी समय सीमा में दोगुनी से भी कम है।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार के तहत प्रति व्यक्ति आय 10 वर्षों में दोगुनी से अधिक हो गई। एनडीए सरकार के तहत यह दोगुनी नहीं हो सकी। प्रति व्यक्ति आय 11 वर्षों में दोगुनी हो गई। मैं दोनों सरकारों के रिकॉर्ड से खुश हूं, लेकिन यूपीए के रिकॉर्ड से थोड़ा अधिक खुश हूं। एक्स पर पोस्ट में चिदंबरम ने कहा कि नीति आयोग के सीईओ ने मीडिया को बताया कि भारत की प्रति व्यक्ति आय 2013-14 में 1438 अमेरिकी डॉलर से दोगुनी होकर 2880 अमेरिकी डॉलर (11 वर्षों में 2024 तक) हो गई है। मोटे तौर पर यह सही है और हम खुश हैं।
भारत बना विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा था कि हम दुनिया में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। हम 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हैं, और यह मेरा डेटा नहीं है। यह आईएमएफ का डेटा है। भारत आज जापान से बड़ा है। केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और जर्मनी ही हमसे बड़े हैं। अगर हम जो सोचा जा रहा है, उस पर टिके रहते हैं, तो अगले 2.5 से 3 वर्षों की बात है, हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे।