मद्रास हाईकोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व सांसद आर अंबारसु की चेक बाउंस मामले में जेल की सजा बरकरार रखते हुए कहा, एक चोर डकैत को लूटने का हकदार नहीं है। कोर्ट ने कांग्रेस नेता की यह दलील खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने एक फाइनेंसर द्वारा कर्ज के तौर पर उन्हें दिए पैसे के स्रोत पर सवाल उठाया था। हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता की याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस पीएन प्रकाश ने कहा, देह व्यापार करने वाली कोई महिला अगर कर्ज देती है तो क्या उसे इस आधार पर कर्ज वापस करने से इनकार किया जा सकता है कि उसने पैसा अनैतिक और अवैध तरीके से कमाया है। इस सवाल का जवाब है ‘नहीं’।
कोई चोर किसी डकैत को वैध रूप से लूटने का हकदार नहीं है।’ अदालत ने पूर्व सांसद और राजीव गांधी मेमोरियल एजुकेशनल ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टी अंबारसु को सजा देने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
कर्ज देने वाले मुकुनचंद बोथरा ने चेक बाउंस की शिकायत में कहा था कि अंबारसु ने 2006 में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 35 लाख रुपये का कर्ज लिया था। उन्होंने इस राशि को चेक से लौटाया, लेकिन खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने की चेक बाउंस हो गए। निचली अदालत ने अंबारसु और ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी पी मणि को इस मामले में दो साल की सजा सुनाई थी।
दोनों ने निचली अदालत के इस फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अपनी याचिका में उन्होंने दावा किया था कि कर्ज देने वाले मुकुनचंद ने 35 लाख रुपये की राशि का खुलासा आयकर रिटर्न में नहीं किया है। इसलिए रकम लौटाने की जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।