भारत में कोरोना अपेक्षा के अनुरूप आक्रामक क्यों नहीं हुआ? इस सवाल के जवाब में डॉ. एमसी मिश्रा ने कहा कि हमें अपनी युवा आबादी का लाभ मिला है। हमारी 65 फीसदी आबादी 35-40 वर्ष के उम्र के बीच का है।
यह वर्ग कोरोना के मामलों में सबसे कम प्रभावित होता है। जबकि यूरोपीय देशों में आबादी के ज्यादा उम्र का होने के कारण उन्हें इसका नुकसान हुआ है।
हमारे देश में युवाओं में माइल्ड स्तर के केस ज्यादा आए हैं, जो बिना किसी विशेष इलाज के सही हो रहे हैं। ऐसे लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत तक नहीं पड़ रही है। केवल गर्म पानी पीने और थोड़ी सावधानी रखने से भी लोग ठीक हो जा रहे हैं।
लगभग 90 फीसदी लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है। ऐसे में अब कुछ केसों के लिए पूरी आबादी को बंद रखने का फैसला ज्यादा समय तक नहीं अपनाया जा सकता। मजदूरों-श्रमिकों के हितों का ध्यान रखते हुए अर्थव्यव्यवस्था को खोलने का फैसला लेना बहुत आवश्यक था, इसलिए सरकार ने बिल्कुल सही फैसला लिया है।
अब कोरोना संक्रमण से कैसे बचा जा सकता है? इस सवाल पर डॉ. मिश्रा ने कहा कि हमें यह मानकर चलना होगा कि हम स्वयं कोरोना संक्रमित हैं या सामने वाला व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव है।
ऐसा करने के दौरान हमें उससे पर्याप्त शारीरिक दूरी रखनी होगी। हाथ धुलने होंगे और चीजों के लेनदेन में सावधानी रखनी होगी। जब तक कोरोना की वैक्सीन का विकास नहीं हो जाता, केवल यही एक तरीका हमें कोरोना से बचा सकता है।
डॉक्टर एमसी मिश्रा ने कहा कि आज हम जानते हैं कि हमें संक्रमण किससे हो रहा है और किस एरिया में सबसे ज्यादा लोग संक्रमित हैं।
हमें ऐसे कंटेनमेंट या रेड एरिया को पूरी तरह सील करके रखना चाहिए, बाकी पूरे एरिया को सावधानी का पालन करते हुए खोल देना चाहिए। इससे हम रेड जोंस में ज्यादा व्यापक स्वास्थ्य सेवा दे पाएंगे और बाकी लोगों को भी बचा सकेंगे।