भारत वन स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक देश में इस वक्त भौगोलिक क्षेत्रफल का 21.71% वनावरण में आता है। केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार देश में 713789 वर्ग किलोमीटर के जंगल क्षेत्र हैं। मंत्रालय की इस लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ वर्षों में पूरे देश में वृक्ष आवरण का दायरा 721 वर्ग किलोमीटर बढ़ गया है। हालांकि हैरानी वाली बात यह है कि पूर्वोत्तर के कई राज्य जो की सबसे ज्यादा जंगलों से आच्छादित रहे हैं उसमें वनावरण कम हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश में 2019 में जहां 66688 वर्ग किलोमीटर में जंगलों का हिस्सा आता था। वह नई रिपोर्ट में 66431 वर्ग किलोमीटर का ही रह गया है। इस राज्य में तकरीबन 200 वर्ग किलोमीटर के वनावरण में कमी आई है। इसी तरह मणिपुर में 16847 वर्ग किलोमीटर का वनावरण था। जो नई रिपोर्ट में घटकर 16598 वर्ग किलोमीटर ही रह गया है। मेघालय में भी जंगलों का हिस्सा 17119 वर्ग किलोमीटर का था जो 17046 वर्ग किलोमीटर में सिमट गया है। इसी तरह से मिजोरम में भी 18006 वर्ग किलोमीटर के जंगलों का हिस्सा घटकर 17820 वर्ग किलोमीटर में सिमट गया है। नागालैंड में भी 12486 वर्ग किलोमीटर का वनावरण कम होकर 12251 वर्ग किलोमीटर पर आ गया है। असम में भी 28327 वर्ग किलोमीटर के जंगलों का दायरा 28312 किलोमीटर का रह गया है।
पूर्वोत्तर के राज्यों को छोड़ दिया जाए तो देश के अलग-अलग हिस्सों में जंगलों का दायरा लगातार बढ़ा है। रिपोर्ट बताती है कि पूरे देश में सबसे ज्यादा जंगलों से आच्छादित राज्य मध्य प्रदेश है। पूरे मध्य प्रदेश में 77482 वर्ग किलोमीटर का वन क्षेत्र या वनावरण है। बहुत कम ही सही लेकिन राज्य में यह क्षेत्र बढ़कर 77493 वर्ग किलोमीटर का हो गया है। इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी 55611 वर्ग किलोमीटर का वन क्षेत्र 2019 में था। जो की बढ़कर 55717 हो गया है। इसी तरह महाराष्ट्र में 50778 वर्ग किलोमीटर के वन क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है। अब यह क्षेत्र 50798 वर्ग किलोमीटर का हो गया है। 51619 वर्ग किलोमीटर वाले उड़ीसा में भी वन क्षेत्र में अच्छा खासा इजाफा हुआ है। 2 साल के भीतर उड़ीसा में 52156 वर्ग किलोमीटर का वनावरण बढ़ा है। रिपोर्ट बताती है कि कर्नाटक में 38575 वर्ग किलोमीटर के जंगलों में वृद्धि होकर 38730 वर्ग किलोमीटर के दायरे में वनावरण हो चुका है। इसी तरह तमिलनाडु के जंगलों में भी थोड़ी ही सही लेकिन 26364 पर किलोमीटर से बढ़कर 26419 वर्ग किलोमीटर के वनावरण की पुष्टि हुई है। केरल में 2144 वर्ग किलोमीटर की जगह पर 21253 वर्ग किलोमीटर का वनों से आच्छादित क्षेत्र घोषित हुआ है।
आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 14806 वर्ग किलोमीटर के वनावरण में थोड़ी सी बढ़ोतरी हुई है। जो अब 14818 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गई है। इसी तरह उत्तराखंड में 24303 वर्ग किलोमीटर के वनावरण का दायरा बनकर 24305 पर किलोमीटर हो गया है। हिमाचल प्रदेश में भी यह आंकड़ा 15434 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 15443 वर्ग किलोमीटर हो गया है। हालांकि पंजाब में आंकड़ा थोड़ा सा कम हुआ है। पहले पंजाब में 1849 वर्ग किलोमीटर में वनावरण था जो घटकर 1847 वर्ग किलोमीटर हो गया है। हरियाणा में एक वर्ग किलोमीटर में वनावरण की बढ़ोतरी हुई है। पहले हरियाणा में 1602 वर्ग किलोमीटर का जंगली क्षेत्र था जो 1603 किलोमीटर का हो गया है।
केंद्र सरकार के आंकड़े बताते हैं कि बहुत कम किलोमीटर के दायरे वाले छोटे राज्य या यूनियन टेरिटरी में भी वनावरण बड़ा है। दिल्ली का वनावरण 195 वर्ग किलोमीटर का पहले भी था और नई रिपोर्ट में भी 195 किलोमीटर की पुष्टि हुई है। चंडीगढ़ में जो आंकड़ा 2019 में 22 वर्ग किलोमीटर का था वह 2021 में 23 वर्ग किलोमीटर का हो गया। यानी 1 किलोमीटर के दायरे में चंडीगढ़ के भीतर वनावरण बढ़ा हुआ पाया गया। दादरा एवं नगर हवेली और दमन दीव में भी 227 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर वन क्षेत्र 228 वर्ग किलोमीटर का हुआ है। हालांकि लक्षद्वीप में जो आंकड़ा 2019 में था वही आंकड़ 2022 में 27 वर्ग किलोमीटर के करीब ही पाया गया है। पुडुचेरी में या आंकड़ा 52 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 53 वर्ग किलोमीटर हो गया है।