वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त को लेकर चीन के साथ हुए समझौते की विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह बेहद और अच्छा सकारात्मक कदम है। भारत और चीन ने गश्त को लेकर जो समझौता किया है, उससे मई 2020 से पहले वाली स्थिति कायम होगी। इस दौरान विदेश मंत्री ने हाल ही में हुई पाकिस्तान यात्रा और वहां के पीएम शहबाज शरीफ से हुई मुलाकात का भी जिक्र किया।
पाकिस्तान यात्रा का बताया अनुभव
पाकिस्तान यात्रा पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं वहां नवाज शरीफ से नहीं मिला। हम वहां एससीओ बैठक के लिए गए थे। भारत एससीओ का अच्छा सदस्य है। हम वहां गए हाथ मिलाया। हमारी मीटिंग अच्छी रही और इसके बाद मैं वापस आ गया।विदेश मंत्री एस जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा महत्वपूर्ण थी, क्योंकि यह करीब नौ साल में पहली बार है, जब भारत का विदेश मंत्री पाकिस्तान पहुंचा। दोनों देशों के बीच कश्मीर मुद्दे और सीमा पार आतंकवाद के कारण संबध तनाव में रहे हैं।
एलएसी को लेकर की बात
एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि विदेश सचिव ने जो कहा है वह ठीक है। चीन के साथ पिछले चार साल से चल रही बातचीत की प्रक्रिया पूरी हो गई है। एलएसी पर 2020 में विभिन्न कारणों से पहले उन्होंने हमें रोका था। इसके बाद हमने उनको रोक दिया। अब हम ऐसे समझौते पर पहुंच गए हैं, जिससे दोबारा गश्त शुरू हो सकेगी।
विदेश मंत्री ने कहा कि यह एक सकारात्मक बदलाव है। हमने इसे पूरे धैर्य और कूटनीतिक तरीके से पूरा किया। हम सितंबर 2020 से इस मुद्दे को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। अब जो शांति और सौहार्द 2020 से पहले सीमा पर कायम था, वह दोबारा हो सकेगा। दरअसल 2020 में एलएसी पर पूर्वी लद्दाख में चीन की गतिविधियों के बाद द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण हो गए थे।
2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा भारत
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि एक भविष्यवाणी के आधार पर भारत 2075 तक 52.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था होगा। मगर मैं कहता हूं कि भारत 2030 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। भारत मौजूदा समय में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका भारत से प्रतिभा और कौशल चाहते हैं। यह भारत के लिए बेहद जरूरी है। मुझे लगता है कि एआई, सेमीकंडक्टरऔर तकनीक के दौर में भारतीय कौशल और प्रतिभा की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत में वह नेतृत्व और दृष्टिकोण है कि वह लगातार आगे बढ़ रहा है।
विदेश मंत्री ने आस्ट्रेलिया और जर्मनी के सांसदों से की मुलाकात
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के सांसदों से मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया कि सांसदों से बातचीत करके खुशी हुई। हमने एफडीआई, प्रौद्योगिकी, आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री सुरक्षा, हिंद-प्रशांत और यूक्रेन को लेकर विचार-विमर्श किया।
कनाडा के मानदंड दोयम दर्जे से भी नीचे : जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि कनाडा के मानदंडों को दोयम दर्जे का कहना भी बहुत छोटा शब्द है। उन्होंने कनाडाई और भारतीय राजनयिकों के साथ होने वाले व्यवहार में अंतर की कड़ी आलोचना की। जयशंकर ने कहा कि जब हम उनसे कहते हैं कि आपके पास ऐसे लोग हैं जो भारतीय नेताओं और राजनयिकों को खुलेआम धमकी देते हैं तो उनका जवाब होता है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। फिर भारतीय उच्चायुक्त को धमकाने पर जब भारतीय पत्रकार सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हैं, तो उन्हें भी इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में स्वीकार करना चाहिए। लेकिन अगर कोई भारतीय पत्रकार कहता है कि कनाडाई उच्चायुक्त साउथ ब्लॉक से बहुत गुस्से में बाहर निकले, तो यह विदेशी हस्तक्षेप है। बात यह है कि उनका मानना है कि हम घर पर अलग तरीके से काम करेंगे। विदेश में अलग तरीके से करेंगे। हम इसे अपने तरीके से करेंगे लेकिन यह आप पर लागू नहीं होता।
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