विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर (फाइल)
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विदेश मंत्री एस जयशंकर एक बार फिर हमलावर दिखे। उन्होंने आलोचना करने वालों पर कड़ी आपत्ति जताई। दरअसल, ब्रिटेन के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर भारत की ओर से देरी हो रही है। मामले में नई दिल्ली और केंद्र सरकार की अलोचना की जा रही है। जयशंकर ने इसी मुद्दे पर आलोचना करने वालों के खिलाफ आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मामले में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। जांच की जा रही है। हम लोगों की आजीविका को प्रभावित नहीं कर सकते।
समझौते के कुछ मुद्दों पर मतभेद
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जयशंकर सोमवार को एक पुस्तक विमोचन समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैंने कई बार इसको लेकर नकारात्मक बातें सुनी हैं। भारत ब्रिटेन के साथ (एफटीए) पर जल्दी से हस्ताक्षर क्यों नहीं कर रहा। कोई यह क्यों नहीं कह रहा कि ब्रिटेन भारत के साथ जल्दी हस्ताक्षर करे। भारत और ब्रिटेन एफटीए को मजबूत करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने एफटीए के 26 में से 20 अध्यायों को अंतिम रूप दे दिया है। पिछले साल अप्रैल में दोनों पक्षों ने दिवाली तक समझौते को पूरा करने की समय सीमा तय की थी। लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद आए, जिस वजह से समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। हम बातचीत कर रहे हैं।
नुकसानों पर भी विचार करना आवश्यक
जयशंकर ने आगे कहा कि माना एफटीए उपयोगी है। लेकिन हमें इसकी जांच करने की आवश्यकता है। हमें एफटीए की खूबियों और नुकसानों पर विचार करना होगा। एफटीए समझौते का एक गलत निर्णय भारत के लाखों लोगों को प्रभावित कर सकता है। यह उनकी आजीविका का मामला है। हम समझौते को निष्पक्ष बना रहे हैं।
क्या है एफटीए?
मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) आयात और निर्यात के बीच व्यापार की बाधाओं को दूर करने और परेशानी मुक्त व्यापार संबंधों को सुनिश्चित करने के लिए दो या दो से अधिक देशों के बीच एक समझौता है।
बेनिन के विदेश मंत्री से की मुलाकात
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को नई दिल्ली में अपने बेनिन समकक्ष ओलुशेगुन अदजादी बकरी के साथ संयुक्त राष्ट्र (यूएन) सुधारों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक और विकास साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा की। जयशंकर के साथ-साथ बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री (एमईए) वी मुरलीधरन भी शामिल हुए। जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि बेनिन के विदेश मंत्री शेगुनबकारी का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमारी राजनीतिक, आर्थिक और विकास साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई। कृषि, शिक्षा, कपड़ा और रक्षा में सहयोग के बारे में बात की। वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।