प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जमीन को अनधिकृत रूप से बेचने, आश्रम से ओशो की मौजूदगी को पूरी तरह समाप्त करने, उनके प्रवचनों और उनकी ध्यान साधना की विधियों को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।
आचार्य रजनीश (ओशो) के 70वें संबोधि दिवस पर मंगलवार को होने वाले कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे अनुयायियों को आश्रम में प्रवेश से रोकने के विरोध में वे धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन (ओआईएफ) के ट्रस्टी और प्रबंधन के सदस्यों की ओर से आश्रम की भूमि में तोड़फोड़ कर इसे अनधिकृत रूप से बेचने की साजिश के तहत बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए उनके आश्रम में प्रवेश से रोक लगाई गई है।
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कार्यक्रम में हिस्सा लेने देश-दुनिया से 1000 से अधिक अनुयायी पुणे आश्रम पहुंचे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जमीन को अनधिकृत रूप से बेचने, आश्रम से ओशो की मौजूदगी को पूरी तरह समाप्त करने, उनके प्रवचनों और उनकी ध्यान साधना की विधियों को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। अनुयायियों ने ओशो की ओर से सृजित रचनाओं और साहित्य के अन्यायपूर्ण कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन और दान में मिले फंड का अनुचित इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया है।