फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Report: वायु प्रदूषण से बढ़ रहा स्तन-फेफड़ों समेत पांच तरह का कैंसर, मृत्युदर में हो रहा सबसे तेज इजाफा

Sat, 23 Mar 2024 06:57 AM IST
यशोधन शर्मा परीक्षित निर्भय

सार

स्विस ग्रुप ने हाल में एक रिपोर्ट जारी कर बताया कि भारत में पीएम 2.5 का औसत वार्षिक स्तर 54.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। वहीं साल 2022 में भारत का औसत पीएम 2.5, 53.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था।
विज्ञापन
ICMR - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वायु प्रदूषण और कैंसर को लेकर अब भारतीय वैज्ञानिकों के पास पुख्ता जानकारी एकत्रित हुई है। इसके मुताबिक, जहरीली हवा की वजह से एक या दो नहीं बल्कि पांच तरह का कैंसर समुदाय में बढ़ रहा है। पीएम 2.5 और पीएम 10 प्रदूषित कण सांसों के साथ शरीर में पहुंच कर कैंसर सेल्स को सक्रिय बना रहे हैं।

विज्ञापन


नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों ने दुनियाभर के चिकित्सा अध्ययनों की समीक्षा के बाद रिपोर्ट तैयार की है जिसमें साफ तौर पर कहा है कि वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़ों के कैंसर के मामले और मृत्यु दर दोनों में इजाफा हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जहरीली हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों के अलावा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओजोन गैस की वजह से स्तन, यकृत, फेफड़े, अग्न्याशय और मूत्राशय का कैंसर बढ़ रहा है। वहीं महिलाओं में बढ़ते स्तन कैंसर के लिए वैज्ञानिकों ने यातायात प्रदूषक, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस को जिम्मेदार बताया है।

वायु प्रदूषण में आठवें  स्थान पर भारत
स्विस ग्रुप ने हाल में एक रिपोर्ट जारी कर बताया कि भारत में पीएम 2.5 का औसत वार्षिक स्तर 54.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। वहीं साल 2022 में भारत का औसत पीएम 2.5, 53.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। साल 2022 की रैंकिंग में भारत दुनिया के सबसे खराब वायु गुणवत्ता वाले देशों में आठवें स्थान पर था। इसी के साथ भारत 134 देशों में से तीसरा सबसे खराब वायु गुणवत्ता वाला देश बन गया है। स्विस ग्रुप आईक्यू एयर के मुताबिक, दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी है।
विज्ञापन


दिल्ली की हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
वायु प्रदूषण को लेकर चर्चित दिल्ली की हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड गैस मौजूद जो आमतौर पर कोयला, तेल, मीथेन गैस या डीजल के उच्च तापमान पर जलने से पैदा होती है।

दुनिया के 61 अध्ययनों की समीक्षा
आईसीएमआर ने रिपोर्ट में यह भी कहा है कि दुनियाभर में प्रकाशित 61 चिकित्सा अध्ययनों के मेटा-विश्लेषण में यह परिणाम सामने आए हैं। इनमें 53 अध्ययन समूह स्तर और आठ केस नियंत्रण मॉडल पर आधारित हैं जो इनकी गुणवत्ता के और बेहतर परिणामों की पुष्टि कर रहा है। आईसीएमआर का कहना है कि मेटा-विश्लेषण से प्राप्त यह परिणाम सामुदायिक कैंसर की रोकथाम और जांच में सहयोग दे सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें