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दिल्ली में मिलीं ड्रैगनफ्लाई की पांच दुर्लभ प्रजातियां

Tue, 04 Sep 2018 02:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में डायनासोर से भी पुराने और मच्छरों के दुश्मन ड्रैगनफ्लाई की गिनती पूरी हो गई है। गिनती के दौरान पांच दुर्लभ प्रजातियों सहित ड्रैगनफ्लाई की दिल्ली में कुल 27 प्रजातियां मिली हैं। अगले वर्ष फिर ओडोनाटा परिवार (जबड़े वाले जीव) की इन प्रजातियों की गिनती की जाएगी। 
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बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के दिल्ली स्थित केंद्र प्रबंधक व वैज्ञानिक सोहेल मदान ने बताया कि दिल्ली के भीतर ड्रैगनफ्लाई की गणना का आंकड़ा काफी पुराना था। पुराने आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में कुल 51 प्रजाति वाली ड्रैगनफ्लाई दर्ज हैं। जबकि अब काफी कुछ बदल चुका है। इसलिए इसकी गणना की गई। 

इनकी गणना असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य, यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क, नीला हौज बायोडायवर्सिटी पार्क, ओखला पक्षी विहार, धनौरी वेटलैंड, सूरजपुर वेटलैंड, नजफगढ़ वेटलैंड, बसई वेटलैंड, लोधी गार्डन व अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क में की गई।
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पांच दुर्लभ ड्रैगनफ्लाई

इस बार की गणना में फुलवोस फॉरेस्ट स्किमर, यलो टेल्ड एशी स्किमर, थ्री स्ट्राइप्ड ब्लू डार्ट, ग्राउंड स्किमर, रेड मार्श ट्रॉटर नाम की पांच दुर्लभ प्रजातियों वाली ड्रैगनफ्लाई मिली हैं।

मच्छरों के आतंक से बचाने के लिए जरूरी

ड्रैगनफ्लाई डायनासोर से भी पुराने हैं। इनका परिवार काफी समृद्ध होता था, क्योंकि पहले साफ पानी वाले जलाशय थे।  अतिक्रमण के कारण अब न तो नम भूमि बची है और न ही साफ जलाशय। ऐसे में इनकी आबादी तेजी से घटी है। मच्छरों के आतंक से बचाने के लिए ऐसे कीटों की सख्त जरूरत है। -डॉ. फैयाज ए खुदसर, प्रभारी, यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क
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यह भी जानें

- दुनिया में इनकी कुल 5329 प्रजातियां हैं। इनमें से 500 प्रजातियां भारत में पाई जाती हैं। 
- उत्तर भारत में इन्हें हेलीकॉप्टर के नाम से भी जाना जाता है। 22 करोड़ वर्ष पूर्व जन्मे ये कीट धरती पर उड़ने वाले पहले जीव हैं। 
-पहले इनकी लंबाई करीब 20 इंच तक होती थी। अब घटकर 3 से 4 इंच तक रह गई है।  
- 2018 में दिल्ली में इनकी 25 प्रजाति ही गिनी गईं, हालांकि इनमें पांच दुर्लभ प्रजातियां हैं। 
-जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 1996 में अपने सर्वे में दिल्ली में कुल 49 प्रजातियों की गिनती की थी। 
- ओडोनाटा का मतलब जबड़े वाले जीव से है। सबसे पहले इनके ही जबड़े तैयार हुए। इस वजह से इन्हें ओडोनाटा कहा जाता है। 
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