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डीएनपीए डायलॉग: गूगल-फेसबुक से साझेदारी बेहतर पत्रकारिता के लिए भी जरूरी, विशेषज्ञों ने कही यह बात

Fri, 25 Nov 2022 10:33 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मेलबर्न के आरएमआईटी विश्वविद्यालय में वरिष्ठ व्याख्याता जेम्स मीस ने बताया कि भारत की मीडिया को आपसी विश्वास बढ़ाकर इस मामले में काम करना होगा। स्टार न्यूज समूह के एमडी पॉल थॉमस ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में आने वाले समय में एपल न्यूज और टिकटॉक को भी समाचार प्रकाशकों की सामग्री उपयोग करने पर मिले विज्ञापनों से अर्जित राजस्व प्रकाशकों से साझा करने के लिए कहा जा सकता है।
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रॉडनी सिम्स, जेम्स मीस और पॉल थॉमस। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समाचार प्रकाशकों और गूगल-फेसबुक जैसी टेक कंपनियों में साझेदारी बेहतर पत्रकारिता के लिए भी जरूरी है। ऑस्ट्रेलिया में प्रकाशकों की समाचार सामग्री पर विज्ञापनों से टेक कंपनियों को हुई कमाई साझा करने का कानून 'न्यूज मीडिया बारगेनिंग कोड' ऐसे कई बदलाव लाया है। इसके तहत हुए समझौते के बाद गार्जियन ऑस्ट्रेलिया समाचार वेबसाइट ने अपना स्टाफ 50 प्रतिशत बढ़ाया। एबीसी, एसबीएस जैसे कई प्रकाशक व मीडिया समूह भी स्टाफ बढ़ा रहे हैं। स्थानीय खबरों की कवरेज बेहतर होने लगी है और खबरों की गुणवत्ता सुधरी है। 

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यह कोड बनाने में ऑस्ट्रेलिया सरकार के सलाहकार रहे रॉडनी सिम्स ने इन सुधारों की जानकारी और भारत के लिए अहम सुझाव डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) द्वारा शुक्रवार को हुए पहले डीएनपीए डायलॉग में दिए। इस वेबिनार के मुख्य वक्तव्य में रॉडनी ने बताया कि अब ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में काम के अवसर बढ़े हैं। खासतौर पर युवा पत्रकारिता में कॅरिअर बना रहे हैं। स्थितियां 10 साल पहले जैसी सुधरती दिख रही हैं। भारत में ऑस्ट्रेलिया जैसे कानून पर उन्होंने कहा कि टेक कंपनियों व समाचार प्रकाशकों में आपसी वार्ता से स्वीकार्य समझौते पर पहुंचने का प्रावधान नये कानून में होना चाहिए। टेक कंपनियां बहुत ताकतवर हैं, मीडिया को बातचीत की मेज पर बराबरी पर लाने के लिए सरकार का सहयोग जरूरी है। वार्ता विफल होने पर सरकार की मध्यस्थता में समझौते का प्रावधान उनकी मदद कर सकता है। टेक कंपनियां नहीं चाहेंगी कि सरकारी मध्यस्थता में समझौता हो, उन्हें इसमें वार्ता से कहीं कड़ी शर्तों का डर होता है। 

मेलबर्न के आरएमआईटी विश्वविद्यालय में वरिष्ठ व्याख्याता जेम्स मीस ने बताया कि भारत की मीडिया को आपसी विश्वास बढ़ाकर इस मामले में काम करना होगा। स्टार न्यूज समूह के एमडी पॉल थॉमस ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में आने वाले समय में एपल न्यूज और टिकटॉक को भी समाचार प्रकाशकों की सामग्री उपयोग करने पर मिले विज्ञापनों से अर्जित राजस्व प्रकाशकों से साझा करने के लिए कहा जा सकता है। इससे पहले, वेबिनार में बताया गया कि 17 समाचार प्रकाशकों का समूह डीएनपीए इस डायलॉग का दूसरा संस्करण 9 दिसंबर को वेबिनार के ही रूप में और फिर 23 जनवरी 2023 को नई दिल्ली में विधिवत आयोजित करेगा।
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तनावपूर्ण थी गूगल-फेसबुक से वार्ता, भारत में एकजुटता जरूरी

एमा मैकडोनाल्ड। - फोटो : अमर उजाला
ऑस्ट्रेलिया के 24 समाचार प्रकाशकों के गुट की ओर से टेक कंपनियों से हुई वार्ता में शामिल रहीं एमा मैकडोनाल्ड ने बताया कि यह बेहद तनावपूर्ण वार्ता थी। गूगल-फेसबुक आधुनिक तकनीकों के दम पर अखबारों को विज्ञापन राजस्व में भारी नुकसान पहुंचा रहे थे। अखबारों के मालिक अगले दो-तीन साल में मीडिया रहेगा या नहीं, इस किस्म के सवाल करते थे। ऑस्ट्रेलिया सरकार की मध्यस्थता का प्रावधान कोड में होने से टेक कंपनियों पर दबाव बन सका। भारत के लिए एमा ने सलाह दी कि कानून बनने पर प्रकाशकों को एकजुट होकर टेक कंपनियों से वार्ता करनी होगी। एकजुटता के बिना वे फायदेमंद समझौते पर नहीं पहुंच पाएंगे।

 

ऐसे भी सुधरी पत्रकारिता : छोटे प्रकाशकों को ज्यादा फायदा मिला

पीटर लुइस - फोटो : अमर उजाला
ऑस्ट्रेलिया के जन नीति विशेषज्ञ पीटर लुइस ने बताया कि प्रकाशकों के विज्ञापन राजस्व में आई तेज गिरावट ऑस्ट्रेलिया में कानून बनाने का ट्रिगर पॉइंट बनी। वहीं समझौते की आलोचना
में आज भी फेसबुक-गूगल दावे करते हैं कि इससे बड़े प्रकाशकों को फायदा हुआ, लेकिन हम जानते हैं कि साझा किए राजस्व में से प्रति पत्रकार मिलने वाला हिस्सा देखें तो मात्र 2-3 पत्रकारों
से चल रहे समाचार संस्थानों को बड़े प्रकाशकों के मुकाबले ज्यादा फायदा हुआ है। वहीं अखबार भरने के लिए दिन में 2-3 खबरों पर काम कर रहे पत्रकार अब हफ्ते में 2 खबरों पर काम कर
पा रहे हैं, इससे भी गुणवत्ता सुधरी है। यही वजह है कि भारत या अमेरिका में ऐसे किसी कानून को बनाने की बात पर टेक कंपनियां असहज महसूस कर रही हैं।
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अनुकूल वातावरण बनाने के लिए चर्चा जरूरी: तन्मय माहेश्वरी, डीएनपीए अध्यक्ष

आयोजन के आरंभ में डीएनपीए अध्यक्ष तन्मय माहेश्वरी ने डायलॉग के उद्देश्यों से सभी को परिचित करवाया। उन्होंने कहा कि हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब पूरी दुनिया में बड़ी टेक कंपनियों और पारदर्शिता पर बात हो रही है। हमें साथ काम करते हुए सभी पक्षों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने पर विमर्श की जरूरत है। उन्होंने और डीएनपीए के पूर्व अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने ऑस्ट्रेलियाई कानून और भारत के संदर्भ में सवाल किए, इस कानून से मिले फायदों, अगले 3 से 5 साल में पत्रकारिता के स्वरूप, पाठकों के डाटा व निजता को टेक कंपनियों से खतरों पर भी बात हुई।
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