सेना के तीनों अंगों में समन्वय बनाने और एक आदेश पर तीनों को सक्रिय करने के लिए 1999 के कारगिल युद्ध के बाद एक समिति ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद के सृजन की सिफारिश की थी। प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री को सुरक्षा व सामरिक मुद्दों पर सलाह देने के लिए तीनों सेनाओं के सर्वोच्च अधिकारी के तौर पर अकेले सलाहकार की भूमिका निभाएगा।
हालांकि उस समय सेना व वायु सेना ने इस व्यवस्था के पक्ष में हामी भर दी थी, लेकिन तत्कालीन नौसेना अध्यक्ष की आपत्ति के चलते सीडीएस की नियुक्ति का मामला खटाई में पड़ गया था। 2012 में नरेश चंद्रा टास्क फोर्स ने भी चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) के स्थायी अध्यक्ष के तौर पर सीडीएस की नियुक्ति की सिफारिश की थी।
फिलहाल अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और जापान सहित दुनिया के कई देशों में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जैसी व्यवस्था है। इस पद के बनने पर सेना के तीनों अंगों के बीच किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए आपसी संवादहीनता जैसी स्थिति नहीं होगी, जिससे उसकी मारक क्षमता और ज्यादा प्रभावी हो जाएगी।
अभी कैसे होता है समन्वय
कारगिल युद्ध के बाद बनी समिति की सिफारिश पर तत्कालीन नौसेना अध्यक्ष के ऐतराज को देखते हुए चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) गठित की गई थी, जिसका अध्यक्ष तीनों सेनाओं में सबसे वरिष्ठतम कमांडर बनता है। हालांकि यह पद तीनों सेनाओं में समन्वय बनाने के लिए गठित किया गया था, लेकिन इसके पास कोई अतिरिक्त शक्ति नहीं होती है। इसलिए यह महज रस्मी पद ही माना जाता है।