रेलवे ने अपने यात्रियों और उनके माल की सुरक्षा के लिए अपनी सभी ट्रेन के हर डिब्बे की रेडियो टैगिंग करने की तैयारी पूरी कर ली है। रेलवे बोर्ड के सदस्य (रोलिंग स्टॉक) राजेश अग्रवाल ने बुधवार को बताया कि करीब 112 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे अपने करीब 3.5 लाख यात्री कोचों और मालगाड़ी के डिब्बों पर रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) टैग लगा रहा है। इससे इन डिब्बों पर नजर रखी जा सकेगी।
अग्रवाल ने कहा कि अभी तक करीब 22 हजार मालगाड़ी के डिब्बों और 1200 यात्री कोच पर यह टैग लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन आरएफआईडी टैग को पढ़ने के लिए देश में विभिन्न रेल मार्गों पर तकरीबन 3500 स्थिर आरएफआईडी रीडर लगाए जाने की संभावना है।
ये रीडर जीएस-1 बारकोड के एलएलआरपी (लो लेवल रीडर प्रोटोकॉल) मानक का इस्तेमाल करते हुए अधिकतम 182 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से दौड़ रही ट्रेन के टैग का डाटा जुटाकर एक केंद्रीय कंट्रोल सेंटर को भेजेंगे। अग्रवाल ने कहा कि यह परियोजना भारतीय रेलवे की सूचना प्रौद्योगिकी इकाई क्रिस संचालित कर रही है। रेडियो टैगिंग का काम पूरा होने के बाद रेलवे के पास अपने हर एक यात्री या मालगाड़ी डिब्बे की लाइव लोकेशन मौजूद रहेगी, जो आपदा की स्थिति में बेहद मददगार साबित होगी।