गरीब ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए 2008 में संसद से पास विधेयक के तहत ग्राम न्यायालय स्थापित नहीं करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कई राज्यों व केंद्र शासित राज्यों को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम न्यायालय की स्थापना पर जवाब दाखिल नहीं करने के लिए आठ राज्यों पर एक एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
जस्टिस एनवी रमणा की पीठ ने हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, असम, गुजरात, तेलंगाना, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सरकार पर ग्राम न्यायालय नहीं खोलने और इस संदर्भ में शीर्ष कोर्ट में जवाब दाखिल नहीं करने पर एक एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। सभी राज्यों व केंद्र शासित राज्यों को ग्राम न्यायालय की स्थापना के लिए एक महीने के भीतर अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया।
जस्टिस रमणा ने कहा, हम देख रहे हैं कि अब तक कई राज्यों व केंद्र शासित राज्यों ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की है। शीर्ष कोर्ट ने एक एनजीओ की जनहित याचिका पर पिछले साल 2 सितंबर को केंद्र, राज्य व केंद्र शासित राज्यों की सरकारों नोटिस जारी किया था। इस याचिका में शीर्ष कोर्ट से राज्यों व केंद्र शासित राज्यों को ग्राम न्यायालय स्थापित करने की अधिसूचना जारी करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
अब तक सिर्फ 208 ग्राम न्यायालय
जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया था कि देश में अब तक सिर्फ 208 ग्राम न्यायालय सक्रिय हैं, जबकि 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 2500 ग्राम न्यायालय स्थापित करने का अनुमान था। अब तक सिर्फ 11 राज्यों ने ग्राम न्यायालय के लिए अधिसूचना दी है। ग्राम न्यायालय अधिनियम को 2008 में संसद की मंजूरी मिली थी।