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पहले मजदूरों को घर पहुंचाया, अब उन्हें रोजगार भी दे रहा रेलवे  

Wed, 29 Jul 2020 04:22 PM IST
Rohit Ojha डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला  

सार

  • कोरोना काल में रेलवे की माल ढुलाई एक साल पहले के स्तर से ज्यादा हुई     
  • रेलवे माल गाड़ियों की औसत रफ्तार में भी लगभग दो गुनी की हुई वृद्धि
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श्रमिक स्पेशल - फोटो : social media
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विस्तार
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कोरोना के संकट काल में रेलवे ने देश की अद्भुत सेवा की है। पहले उसने श्रमिकों को उनके घर पहुंचाया, अब वह उन्हें रोजगार भी उपलब्ध करवा रही है। रेलवे अब तक 63.1 लाख श्रमिकों को उनके घर पहुंचा चुकी है, तो पिछले एक महीने में वह दो लाख से ज्यादा मानव श्रम दिवस के कार्य भी श्रमिकों को उपलब्ध करवा चुकी है। इस दौरान रेलवे माल गाड़ियों की औसत रफ्तार में भी दोगुनी की वृद्धि हुई है। यह 22.5 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 46.2 किमी प्रति घंटा हो गई है। रेलवे की माल ढुलाई क्षमता भी एक साल पूर्व की क्षमता से अधिक दर्ज की गई है।

श्रमिकों को भी पहुंचाया अपने घर

कोरोना काल में देश के कोने-कोने से श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने के काम को भी रेलवे ने बखूबी अंजाम दिया। रेलवे की जानकारी के मुताबिक अब तक 4615 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से 63.1 लाख श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचाया गया है। मई महीने में सबसे ज्यादा 4109 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई थी। जून महीने में इनकी संख्या 493 और जुलाई में केवल 13 रह गई है।

अंतिम श्रमिक स्पेशल ट्रेन नौ जुलाई को चलाई गई थी। इसके बाद से किसी राज्य ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग नहीं की है। रेलवे ने कहा है कि जब भी किसी राज्य से इस तरह के ट्रेन की मांग की जाएगी, वह इसे उपलब्ध कराएगा। आज की स्थिति में किसी राज्य ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन की मांग नहीं की है।

रोजगार भी उपलब्ध करा रहा रेलवे

रेलवे ने केवल श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने का ही काम नहीं किया है, बल्कि यह उनके लिए बड़ी मात्रा में रोजगार भी उपलब्ध करवा रहा है। गरीब कल्याण रोजगार अभियान योजना के अंतर्गत 12 लाख मानव श्रम दिवस सृजित किए जाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके तहत रेलवे के चालू 170  प्रोजेक्ट्स के जरिए देश के 160 जिलों में श्रमिकों को रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक दो लाख से अधिक मानव श्रम दिवस उपलब्ध कराया जा चुका है।  

इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ लेने वाले राज्यों में बिहार और उत्तर प्रदेश सबसे आगे हैं। इनके आलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, ओडिशा और झारखंड में भी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। 20 जून से शुरू हुई इस योजना में 11,296 श्रमिकों को अब तक रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इस योजना के लिए 1800 करोड़ की धनराशी उपलब्ध कराई गई है।  

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माल ढुलाई क्षमता एक साल पूर्व से अधिक

रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक़ एक साल पूर्व 27 जुलाई 2019 को 31.2 लाख मीट्रिक टन सामान की ढुलाई हुई थी जो कोरोना काल की परेशानी के बावजूद इस वर्ष बढ़कर 31.3 लाख टन हुई है। इसे व्यापारियों के रेल पर बढ़ते भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। रेलवे के इसी सेवा का प्रभाव माना जा रहा है कि कोरोना काल के संकट के दौरान भी देश के किसी हिस्से में आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी नहीं होने पाई।

रफ्तार बढ़ी

इसी अवधि के दौरान माल गाड़ियों की रफ्तार में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। एक वर्ष पूर्व 27 जुलाई 2019 को मालगाड़ियों की औसत रफ्तार 22.5 किलोमीटर प्रति घंटा थी जो इस वर्ष की 27 जुलाई को बढ़कर 46.2 किमी प्रति घंटा हो गई है। यह दोगुनी से अधिक रफ्तार की वृद्धि है। इस प्रकार मालगाड़ियों की स्पीड में तेज बढ़ोतरी हुई है जिससे सामान की तेज गति से ढुलाई होना निश्चित हुआ है।

तकनीकी का मिला लाभ

ट्रेन की सेटेलाईट ट्रैकिंग से उनके गंतव्य तक पहुंचने के समय में सुधार हो रहा है। रेलवे ने अब तक लगभग 6500 रेल इंजनों को सेटेलाइट तकनीकी से लैस कर दिया है, जबकि लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि इस साल के अंत तक 6000 अन्य रेल इंजनों को भी सेटेलाइट तकनीकी से जोड़ दिया जाएगा। अगर यह लक्ष्य प्राप्त कर लिए जाता है तो इससे रेलगाड़ियों की समय सीमा में और तेज सुधार आने की संभावना बढ़ जाएगी।

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