वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि विदेश स्थित भारत खाते की अवैध गतिविधियों के लिए पनामा दस्तावेज की कड़ी जांच की जा रही है। दूसरी तरफ, जान बूझकर डिफॉल्ट करने के मामलों, जैसे विजय माल्या प्रकरण, से निपटने के लिए कानून की पूरी सहायता ली जा रही है। वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा के अनुसार, ‘चाहे आप पनामा दस्तावेज की बात करें या एचएसबीसी सूची की या किसी अन्य सूचना की जो हमें मिलती है, इन सब मामलों में हम सबसे पहले यह देखते हैं कि इस प्रकार की गतिविधि वैध है या अवैध।
इन मामलों की कड़ी जांच की जा रही है। कोई भी व्यक्ति (दोषी) बच नहीं सकता।’ सरकार ने पहले ही विभिन्न एजेंसियों के समूह को पनामा दस्तावेज मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंप दी है। इस समूह में सीबीडीटी, वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) और आरबीआई के प्रतिनिधि शामिल हैं। पनामा दस्तावेजों में 500 भारतीय के नाम हैं जिनमें सेलेब्रिटीज और उद्योगपति भी शामिल हैं। इन पर कथित तौर पर टैक्स हैवन माने जाने वाले पनामा की विदेशी इकाइयों में निवेश करने का आरोप है।
जहां तक जान बूझकर डिफॉल्ट करने वालों की बात है तो हैं तो ऐसे लगभग 7,686 मामले हैं जिनमें सार्व जनिक बैंकों के 66,190 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। इनमें से 1,669 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।