देश के सबसे बड़े
बैंकिंग घोटाले के मद्देनजर
वित्त मंत्रालय ने सरकारी बैंकों से कहा है कि वे 15 दिन के भीतर अपनी कमजोरियों के जोखिम को पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए कदम उठाएं। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करें। बैंकिंग उद्योग में बढ़ते जोखिमों को कम करने के लिए उन्हें एक ब्लूप्रिंट तैयार करने का भी निर्देश दिया गया है।
मंत्रालय के वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने मंगलवार को सभी सरकारी बैंकों के कार्यकारी निदेशकों और चीफ टेक्नीकल ऑफिसरों (सीटीओ) से कहा है कि वे 15 दिन की समयसीमा पूरा होने से पहले अपने अंदर पैदा होने वाले जोखिमों से लड़ने का एक खाका तैयार कर लें। इस संबंध में किए गए ट्वीट में कुमार ने कहा है कि जोखिमों से लड़ने के ब्लूप्रिंट में तकनीकी समाधान के साथ वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तक के मामले शामिल किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि कार्यकारी निदेशकों और सीटीओ के समूह की यह जिम्मेदारी होगी कि वह बैंकिंग सेक्टर के सर्वोत्तम कार्य व्यवहार से सीखने की कोशिश करें और मौजूदा व्यवस्था की खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि बैंकों के निदेशक बोर्ड को वरिष्ठ अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय करनी होगी। सरकारी बैंकों को दी गई 15 दिन की यह मोहलत केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सुधार एजेंडे का हिस्सा है जिसे एनहांस्ड एक्सेस एंड सर्विस एक्सीलेंस (ईएएसई) प्रोग्राम के तहत शुरू किया गया है।