मोदी सरकार के मंत्री सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से जहां एक ओर खुद को असहज महसूस कर रहे है वहीं दूसरी ओर इसे अधिकारों में अतिक्रमण भी मान रहे हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कार्यपालिका और विधायिका के कार्यक्षेत्र में न्यायपालिका की बढ़ती दखलंदादी पर चिंता जताते हुए कहा है कि लोकतंत्र की इमारत को धीरे धीरे कमजोर किया जा रहा है।
जेटली ने यह भी कहा कि टैक्स औ वित्तीय मामले अदालतों के हवाले नहीं किए जाने चाहिए। जेटली ने यह बाते तब कहीं जब राज्यसभा में वित्त विधेयक को मंजूरी मिलनी थी। गौरतलब है कि बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने सूखे को लेकर राज्य सरकारों के उदासीन रवैये को लेकर फटकार लगाई थी और केंद्र सरकार को इस बात का आदेश दिया था कि एसटीएफ बनाया जाए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को केंद्र सरकार सरकार के अधिकारों में न्यायपालिका का अतिक्रमण मान रही है। जेटली ने यह बात उस दिन कही थी जब उत्तराखण्ड में हरीश रावत की सत्ता राष्ट्रपति शासन से उबर कर वापसी कर रही थी।
इससे पहले कांग्रेस की ओर से राज्यसभा में यह मांग की गई थी यदि जीएसटी के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मामला सही नहीं बैठता तो ऐसी दशा में सुप्रीम कोर्ट के जज ही इस मामले में फैसला सुनाएं। जिस पर जेटली ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो यह भारतीय लोकतंत्र पर बड़ा हमला होगा। बता दें कि जेटली से पहले केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी न्यायालय के फैसलों पर कहा था कि जजों को इस्तीफा देकर चुनाव लड़ना चाहिए।