26 जनवरी की घटना के बाद सिंघु बॉर्डर का नजारा काफी कुछ बदला हुआ नजर आ रहा है। बॉर्डर पर किसानों की संख्या में पहले की तुलना में कमी आई है। वहीं अब तक किसानों से भरे रहने वाले पंडाल, लंगर और ट्रॉलियां भी पहले जैसे भरी हुई नहीं दिखाई दे रही हैं। इधर, पुलिस प्रशासन ने किसी भी घटना से निपटने के लिए क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया है।
हालांकि लाल किला की घटना के बाद से किसानों में भी आक्रोश देखने को मिल रहा है। जिसका नतीजा ये है कि अधिकांश किसान अपने परिवार के साथ घरों को लौट गए हैं। वहीं कुछ जत्थे भी खाली हो गए हैं। सुबह से देर रात तक गुलजार रहने वाले लंगर भी अब सूने नजर आ रहे हैं। इसके अलावा अब किसान नेताओं के भाषण भी सुनने के लिए लोग नहीं जुट रहे हैं।
ऑल इंडिया किसान फेडरेशन के अध्यक्ष किसान नेता प्रेम सिंह भंगू ने अमर उजाला से कहा, ऐसा नहीं है कि लोग कम हुए हैं। जो लोग ट्रैक्टर परेड में आए थे वो लौट चुके हैं। बाकी सब दिन में अपने जत्थों में आराम करते हैं। जहां तक पंडाल और लंगर का सवाल है तो ऐसा नहीं है कि सब पहले जैसा ही चल रहा है। किसान नेताओं को सुनने के लिए भी लोग पहुंच रहे हैं।
युवा किसान हरसिमरन ने अमर उजाला को बताया, 26 जनवरी की शाम से ही ये स्थिति बनी हुई है। पहले हर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लंगर होता था, लेकिन अब कुछ चुनिदा बड़ी जगहों पर ही लंगर सेवा हो रही है। वहीं दूसरी सबसे ज्यादा परेशानी मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से हो रही है। इंटरनेट भी नहीं चल पा रहा है। न तो हम किसी को फोन कर सकते हैं न किसी का फोन आ सकता है। घर पर भी संपर्क करने के लिए हमें बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं एक अन्य किसान सुरजीत ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले जैसी स्थिति अब नहीं रह गई है। पुलिस ने रास्ते बदल दिए हैं। इससे हमें ज्यादा परेशानी हो रही है। बॉर्डर पर हर जगह पुलिस ने पहरा बढ़ा दिया है। आने-जाने पर पुलिस रोक-टोक कर रही है। यहीं नहीं अगर कोई सामान भी बाहर से खरीद कर लाते हैं तो उसकी भी पुलिस जांच करती है। इसके बाद अंदर जाने देती है।
पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा, किसानों की मुश्किलें बढ़ीं
26 जनवरी की घटना के बाद बॉर्डर को अस्थाई छावनी में बदल दिया गया है। पुलिस बल के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। सुरक्षाबलों को किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश भी दिए गए हैं। सुरक्षाकर्मियों के लिए अस्थाई किचन और रहने के लिए टेंट भी लगा दिये गए हैं।
बॉर्डर पर स्थानीय निवासी और किसानों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस ने किसानों के धरना स्थल तक जाने वाले रास्ते को चार किलोमीटर पहले बंद कर दिया गया है। इसके अलावा सिंघु बॉर्डर पर किसानों के आने-जाने के एक रास्ते को पुलिस ने बंद कर दिया। जिससे किसानों को दो किलोमीटर लंबा चक्कर काट कर धरना स्थल पर पहुंचना पड़ रहा है।