पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले मतुआ समुदाय के ठाकुर परिवार में फिर से बवाल मच गया है। केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर और उनके बड़े भाई, भाजपा विधायक सुभ्रत ठाकुर के बीच विवाद अब खुले टकराव में बदल चुका है। इस पारिवारिक कलह ने बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
कहां से हुई विवाद की शुरुआत?
रविवार को ठाकुरनगर स्थित नाट मंदिर, जो मतुआ समुदाय का मुख्य केंद्र माना जाता है, में शांतनु ठाकुर के समर्थकों ने एक शिविर आयोजित किया। सुभ्रत ठाकुर ने इसका विरोध करते हुए कहा कि नाट मंदिर सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए है, राजनीतिक गतिविधियों के लिए नहीं। इसके बाद दोनों भाइयों के समर्थकों में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। शांतनु के गुट ने सुभ्रत पर भक्तों को धमकाने का आरोप लगाया। वहीं सुभ्रत ने पलटवार करते हुए कहा कि शांतनु सामुदायिक संस्थाओं पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे हैं।
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दोनों भाइयों के आरोप और पलटवार
शांतनु ठाकुर ने अपने बड़े भाई पर आरोप लगाया कि वे मंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते हैं और शायद टीएमसी में जाने की भी तैयारी कर रहे हैं। वहीं इसके जवाब में सुभ्रत ठाकुर ने कहा, 'शांतनु समुदाय की शक्ति को हड़पना चाहते हैं।' 'जाति प्रमाण पत्र और मतुआ कार्ड के वितरण में गड़बड़ी हो रही है। असली लाभार्थियों को सीएए का फायदा नहीं मिल रहा।' उन्होंने यहां तक कहा कि शांतनु 'धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल करके राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं।'
परिवार में बंटवारा साफ
सुभ्रत के साथ उनकी मां छबिरानी ठाकुर, बुआ और टीएमसी सांसद ममताबाला ठाकुर, और बहन मधुपर्णा ठाकुर हैं। वहीं शांतनु के साथ उनके पिता मंजुलकृष्ण ठाकुर (पूर्व टीएमसी मंत्री और मतुआ महासंघ के मुख्य सेवायत)। उन्होंने दिल्ली से वीडियो जारी कर बेटे शांतनु का समर्थन किया और सुभ्रत की आलोचना की।
क्या है भाजपा की मुश्किलें?
यह झगड़ा भाजपा के लिए सिरदर्द बन गया है। हालांकि अभी तक पार्टी नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है। वहीं एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया, 'चुनाव से पहले यह विवाद सबसे अनचाही स्थिति है। दोनों भाई हमारे लिए जरूरी हैं। पार्टी किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं कर सकती।' पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और विपक्ष के नेता सुभेंदु अधिकारी ने कार्यकर्ताओं को मामले पर चुप रहने की सलाह दी है। 2019 लोकसभा चुनाव में मतुआ वोटों से भाजपा को बड़ी जीत मिली थी। 2021 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों में भी मतुआ समर्थन ने भाजपा को ताकत दी। लेकिन अगर ठाकुर परिवार बंटा रहा, तो मतुआ मतदाता बिखर सकते हैं। 2026 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में भाजपा के लिए यह झगड़ा बड़ा खतरा है।
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तृणमूल कांग्रेस में खुशी का कारण?
सत्ताधारी दल इस विवाद को भाजपा की कमजोरी मानकर इसका मजा ले रही है। पार्टी सूत्र ने तंज कसते हुए कहा, 'भाजपा खुद ही अंदर से टूट रही है। हमें ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं।'