दो वर्षीय बच्चे की लेफ्टिनेंट कर्नल मां केतबादले पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस पर विचार करने के लिए कहा है। लेफ्टिनेंट कर्नल अनु डोगरा का कहना है कि उनका तबादला ऐसी जगह नहीं किया जा सकता जहां क्रेच व उनकी देखभाल तक की सुविधा न हो। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल(एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी को लेफ्टिनेंट कर्नल अनु डोगरा केतबादले पर विचार करने के लिए कहा है। एएसजी को बुधवार को सरकार का पक्ष रखने केलिए कहा है।
लेफ्टिनेंट कर्नल अनु डोगरा ने अपने याचिका में 24 नवंबर और 29 दिसंबर के उस आदेश को निरस्त करने की मांग की है जिनमें तबादले की खिलाफ दाखिल उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। महिला सैन्य अधिकारी का तबादला जोधपुर से कहीं दूसरी जगह कर दिया गया है। याचिका में कहा गया कि तबादला उन्हें प्रताड़ित करने के लिए किया गया है। उसका कहना है कि यह दो वर्षीय बच्चे की मां का अपमान करना है। महिला के पति भी जोधपुर में ही कार्यरत हैं।
याचिका में महिला अधिकारी ने कहा है कि इतनी कम उम्र में बच्चे की अनदेखी से उसकी मानसिक शांति पर असर पड़ा है। इससे उसके काम करने की क्षमता पर भी असर पड़ा है। यह साफ तौर पर प्रताड़ित करने वाली बात है। अनु डोगरा का कहना है कि केंद्र सरकार और सेना, महिला व बाल कल्याण मंत्रालय द्वारा बनाई गई नीति के खिलाफ नही जा सकती। डोगरा ने तबादले को मौलिक अधिकार का हनन बताया है।